आखिर क्यों करते हैं लोग आत्महत्या?

 Mumbai
आखिर क्यों करते हैं लोग आत्महत्या?

आत्महत्या एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर ही लोगों के रौगटे खड़े हो जाते है।  आत्‍महत्‍या एक अनचाही और अनपेक्षित मौत की दर्दनाक स्थिति है, जो एक हंसते-खेलते जीवन का त्रासदी के साथ अंत करती है।   फांसी, जहर, आग और नदी में कुंदना जैसे कितने ही नए-पुराने तरीके मौत को गले लगाने के लिए आजमाएं जा रहे हैं।

हालही में मुंबई में 24 वर्षीय युवा ने बांद्रा वर्ली सी लिंक से आत्महत्या कर ली।  इसके पहले भी मुंबई मे ही एक युवक ने अपनी मौत के पहले एक विडियों बनाया और फिर इमारत से छलांग लगा  आत्महत्या कर ली। आखिर क्यो आज का युवा इतना हताश होते जा रहा है की उसे आत्महत्या ही हर समस्या का आखिरी समाधान लगता है? क्या इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में युवा इतना अधिक अपेक्षाएं करने लगा है की अगर उसे वह चीज ना मिले तो फिर वह आत्महत्या कर ले?

आत्‍महत्‍या के विचार को, आत्‍महत्‍या उद्भावना के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें स्‍वयं को मारने के विस्‍तृत योजना से लेकर क्षणभंगुर विचार आते रहते हैं। जिन लोगों के मन में आत्महत्या के विचार आते हैं, उन्हें उस समय कोई कोई और रास्ता नहीं दिखता है।  सिर्फ मौत की बातें ही उनके चारो तरफ घूमती है।  उनके आत्महत्या के विचार इतने प्रबल होते हैं, कि उन्हे उस समय ना ही तो अपने परिवार वालो के बारे में और ना ही अपने भविष्य की चिंता होती है।  वे वास्तविक, मजबूत और तात्कालिक होते हैं।  

आत्‍महत्‍या के विचार का अनुभव करने वाले बहुमत में लोग अपने विचार पर लंबे समय तक नहीं टिकते, वह आत्‍महत्‍या का प्रयास कर लेते हैं। हालांकि कुछ लोगों के आत्‍महत्‍या के विचार की योजना विफल हो जाती हैं। 

कैसे आम है आत्महत्या?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2015 के आंकड़ों के अनुसार भारत में हर घंटे एक छात्र आत्महत्या करता है। वर्ष 2015 में, 8,934 छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं। 2015 तक पांच साल में, 39,775 छात्रों ने अपनी जान ली है। 5 वर्षों में लगभग 40,000 छात्रों ने की आत्महत्या । मेडिकल जर्नल लांसेट की 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 29 साल के बीच के किशोरों-युवाओं में आत्महत्या की ऊंची दर के मामले में भारत शीर्ष के कुछ देशों में शामिल है। 2015 में महाराष्ट्र में सर्वाधिक 1230 छात्र-छात्राओं ने खुदकुशी की। यह कुल आत्महत्या (8934) का 14 फीसदी है।  साल 2013,2014 और 2015 में  मुंबई में ३ हजार ६३७ लोगों ने आत्महत्या कर जीवन त्याग दिया था।  जिसमें 2 हजार 304 पुरुष और 1 हजार 333 महिला शामिल है। आत्महत्या करने वालों में 15 से 45  वर्ष के लोगों की संख्या सर्वाधिक होने है।

आत्महत्या के विचार के लक्षण-

विशेषज्ञों की मानें तो समाज की अधिकतर परेशानीयों का जन्‍म हमारे घरों में ही होता है। खुद को मिटा देने की घटनाओं में ज्‍यादातर बच्‍चे, युवा और नौजवान ही शामिल हैं।  वैसे तो आत्यहत्या किसी भी समस्या का कोई भी हल नहीं है। लेकिन कई बार आत्महत्या करनेवालो के ऐसी कई लक्षण दिखते है जो इस बात की ओर इशारा करते है की आत्यमहत्या करनेवाले युवक की मानिसक स्थिती सही नहीं है। और वह आत्महत्या के बारे में विचार कर रहा है।

- वह अक्सर बोल-चाल में जाने-अनजाने कह जाता है कि मैं आत्महत्या कर लूंगा।

- इससे तो अच्छा होता मैं मर जाता

- इससे तो अच्छा होता मैं पैदा ही नहीं हुआ होता

- या कल तुम या तुम लोग मुझे याद करोगे।

कई समय पर अपने आप को बेहद असाहय महसुस करता है।  वो अक्सर अकेले में समय बीताना पसंद करते है। खुद के प्रति की बार वह नफरत भी जताते है। बेचैनी, गहन हताशा या फिर आत्महत्या सम्बन्धी चर्चा भी कई बार करते है।  


क्या है कारण-

वैसे तो आत्महत्या करने के कई कारण होते है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है की अपने आप से हताश होना आत्महत्या का एक बड़ा कारण है, इसके अलावा भी कई अन्य महत्वपुर्ण कारण बताए जाते है-

- तनाव

- नशीले पदार्थ का दुरुपयोग

- आत्महत्या का पारिवारिक इतिहास

- बेरोजगारी, गरीबी, बेघर होना और भेदभाव किया जाना

कैसे रोके आत्महत्या के विचारो को-

समय पर डॉक्‍टर से मिलें, निर्देशित दवाएं लें

शराब और अवैध ड्रग्स से बचने की कोशिश करें।  

बाहर की दुनिया से जुड़े रहने की कोशिश करें।

एक्‍सरसाइज करें।

संतुलित और स्‍वस्‍थ आहार लें।

रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की लगातार नींद लें।

ऐसी चीजों की तलाश करें जो आपको खुशी देती है।

कोई भी समस्या होने पर उसे परिवार या दोस्तो के साथ शेयर करे


मनोवैज्ञानिक  डॉ. सागर मुंडाडा कहना है की आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया लोगों के जिंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन चुका है।  कई बार लोग अपनी जिंदगी से जुड़ी कई बातें सोशल मीडिया पर डालते है जिससे लोग उनकी कई बातो को जानते है, और कभी कभी उनका मजाक भी बन जाता है जो उस शख्स को दारु और ड्र्गस की ओर खिचता है। जो की आत्महत्या का अहम कारण हो सकता है।


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