दूसरे धर्म में शादी करने के बाद भी नहीं बदलता महिला का धर्म- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा की देश में ऐसा कोई भी कानून नहीं जिसके तहत एक मजहब की महिला अगर दूसरे मजहब के आदमी से शादी करती है तो उसका पहला मजहब छूट जाएगा

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गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में की सुनवाई करते हुए कहा की अगर कोई महिला दूसरे मजहब के शख्स से शादी करती है तो उसका धर्म नहीं बदल जाएगा। इस तरह का कोई कानून हमारे देश में नहीं है। एक पारसी महिला के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की कान्स्टीट्यूशन बेंच ने ये कहा है।  


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क्या है पूरा मामला  

दरअसल गुलरुख एम. गुप्ता नाम की एक  महिला ने एक हिंदू शख्स से शादी कर ली थी।  लेकिन वलसाड़ स्थित  पारसी बोर्ड इस महिला को इसकी इजाजत नहीं दे रहा था।  साल 2010 में इस मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था की अगर कोई महिला किसी दूसरे धर्म के पुरुष से शादी करती है तो उसका वहीं धर्म होगा जो उसके पति का है। जिसके बाद महिला ने हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल की। 


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क्या कहना है सुप्रीम कोर्ट का

सुप्रीम कोर्ट  ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा की देश में  ऐसा कोई  भी कानून नहीं जिसके तहत एक मजहब की महिला अगर दूसरे मजहब के आदमी  से शादी करती है तो उसका पहला मजहब छूट जाएगा।हमारे यहां स्पेशल मैरिज एक्ट है। और ये इजाजत देता है कि दो अलग मजहबों के लोग शादी के बाद भी अपनी-अपनी धार्मिक पहचान कायम रख सकते हैं।

4 दिसंबर को अलगी सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी। इस दिन वलसाड बोर्ड ट्रस्ट का पक्ष भी सुना जाएगा। 9 अक्टूबर को ही इस मामले को कान्स्टीट्यूशन बेंच को सौंपा गया था।


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