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LGBT पर दिये फैसले पर फिर से विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट !

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने पांच LGBT नागरिकों द्वारा दाखिल याचिका को बडी बेंच के लिए रैफर किया है।

LGBT पर दिये फैसले पर फिर से विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट !
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए 2013 के सुरेश कुमार कौशल बनाम नाज फाउंडेशन मामले में दो जजों की बेंच के उस फैसले पर दोबारा विचार करने पर सहमति जता दी है।  यानी की इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर से विचार करेगा।   साथ ही कोर्ट इस बात पर भी विचार करेगा की क्या भारतीय दंड संहिता की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा जाए या नही।  


' लीओ ' की जीत हमारी हार है।


चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने पांच LGBT नागरिकों द्वारा दाखिल याचिका को बडी बेंच के लिए रैफर किया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका की प्रति सेंट्रल एजेंसी में देने को कहा है ताकि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार अपना पक्ष रख सके।


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आईपीसी की  धारा 377 समलैंगिक यौन संबंध (पुरुष-पुरुष तथा महिला-महिला- LGBT) स्थापित करने को अपराध करार देती है, जिसे नाज़ फाउंडेशन मामले में दिए फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गलत ठहराया था और इसे अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। हालांकी जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट मे  दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को पलट दिया और धारा 377 यानी होमोसेक्सुअलिटी को फिर अपराध करार दे दिया।

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