एचआईवी से लड़ रही इस किन्नर ने जिंदगी से नही मानी हार !


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कहते है हमारे समाज में किन्नर के लिए जीना जीतना मुश्किल होता है उससे कही ज्यादा मुश्किल होता है लोगों का उसे स्वीकार करना । लेकिन ये हालत तब और भी बदत्तर हो जाती है जब किसी किन्नर को एड्स जैसी खतरनाक बीमारी का शिकार होना पड़ता है। ऐसे हालात में ना तो उन्हे समाज स्वीकार करता है और ना ही उन्हे अपनी जिंदगी अपने तरिके से जीने का समय मिल पाता है, लेकिन डॉली नाजिम खान नाम की एक किन्नर ने इन सभी मुश्किलों का सामना करते हुए अब अपनी जिंदगी दूसरों के जीवन को खुशहाल करने में लगा दी है।

डॉली नाजिम खान एक ट्रांसजेडर है, वह उत्तर प्रदेश की रहनेवाली है। डॉली १९९३ में एड्स से ग्रसित हो गई थी। जब डॉली ने ये बात अपने परिवारवालों को बताई तो परिवार ने साथ देने के बजाए उसे घर से ही निकाल दिया। हालात विपरित होने के बाद भी डॉली ने हिम्मत नहीं हारी।

मुंबई में ली पनाह

डॉली को जब उसके परिवार वालों ने घर से बेघर कर दिया तब डॉली ने मुंबई में आसरा लिया। मुंबई में आने के बाद उसके सामने अपने रहने और पेट भरने के लिए भोजन का सवाल खड़ा हो गया। डॉली नें विक्रोली के गोदरेज हॉस्पिटल में काम करना शुरु किया। डॉली उसी हॉस्पिटल में रहती भी है।

मरीजों का रखती है खास ख्याल

डॉली , गोदरेज अस्पताल के एआरटी सेंटर में काम करती है। मरीजों का ख्याल रखने के साथ वह उन्हे जीवन में हमेशा सकारात्मक रहने का भी संदेश देती है। डॉली को अस्पताल के स्टॉफ ने भी अपना लिया है। जिंदगी में इन सभी परेशानियों का सामना करने के बाद भी डॉली ने कभी एड्स को अपनी कमजोरी नही बनने दिया । वह आज भी लोगों के साथ हसते मुस्कुराते बातें करती है। ऐसा लगता है जैसे उसे जिंदगी का हर एक पल मुस्कुराते हुए जीना है।



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