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WR में 8 तो CR में 60 प्लेटफॉर्मों की ऊंचाई बढ़ाया जाना अभी भी बाकी

कोर्ट के आदेश के फलस्वरूप मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे ने प्लेटफॉर्म और ट्रेनों के गैप को काम करने का काम तो शुरू किया लेकिन अभी की कई रेलवे स्टेशन ऐसे हैं जहां यह गैप काफी बड़े हैं और आये दिन इस गैप में गिर कर यात्री अपनी जान गंवा रहे हैं।

WR में 8 तो CR में 60 प्लेटफॉर्मों की ऊंचाई बढ़ाया जाना अभी भी बाकी
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मुंबई उपनगर में बढ़ती रेलवे दुर्घटनाओं का एक कारण लोकल ट्रेन और रेलवे प्लेटफॉर्म के बीच होने वाला बड़ा गैप भी है। इसी गैप में गिर कर कई लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। मार्च 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने खुद दखल देते हुए इस गैप को काम करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के फलस्वरूप मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे ने प्लेटफॉर्म और ट्रेनों के गैप को काम करने का काम तो शुरू किया लेकिन अभी की कई रेलवे स्टेशन ऐसे हैं जहां यह गैप काफी बड़े हैं और आये दिन इस गैप में गिर कर यात्री अपनी जान गंवा रहे हैं। 


WR में 8 तो CR में 60 प्लेटफॉर्मों बाकी

आरटीआई कार्यकर्ता प्रतीक मिश्रा द्वारा मांगी गयी एक सूचना के तहत को तथ्य सामने आए है उसके अनुसार मध्य रेलवे मुंबई में कुल 273 प्लटफॉर्म हैं जिनमें से 60 प्लेटफॉर्मों की ऊंचाई अभी भी नहीं बढ़ाई गई है और यह प्लेटफॉर्म अभी भी खतरनाक स्थिति में हैं। जबकि पश्चिम रेलवे में कुल 145 प्लेटफॉर्म हैं जिनमें से 137 प्लेटफॉर्मों की ऊंचाई बढ़ाई गई है और 8 प्लेटफॉर्म की ऊंचाई अभी भी बढ़ाया जाना बाकी है।

यही नहीं आरटीआई के अनुसार मध्य रेलवे में स्थित 75 स्टेशनों में से 60 प्लेटफॉर्मों की ऊंचाई बढ़ाने का काम अभी भी जारी है। इसमें 

हार्बर लाइन में गोवंडी, चेंबूर और 

ट्रान्स हार्बर में ऐरोली, रबाले, घनसोली, कोपरखैरणे के साथ साथ मस्जिद, कुर्ला, ठाणे, डोंबिवली, कल्याण, शहाड, टिटवाला, शेलू, नेरुल, कर्जत, खोपोली, केलवली, डोलवली आदि स्टेशन शामिल हैं।  इन सारे प्लेटफार्मों की ऊंचाई बढ़ाने का काम अभी भी जारी है।

पश्चिम रेलवे के मुताबिक पश्चिम रेलवे में केवल 8 प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाई जानी बाकी है जिसमें से चार का काम प्रगति पर है, जबकि इन्ही आठों में से एक प्लेटफॉर्म का यूज बिलकुल नहीं किया जाता है।

कोर्ट ने 2014 में दिया था आदेश 

आपको बता दें कि जनवरी 2014 में मोनिका मोरे नामकी एक छोटी लड़की इसी गैप में गिर कर अपने हाथ पैर गंवा बैठी। इस बात को संज्ञान में लेते हुए रलेवे ने खुद ही पीआईएल दाखिल की, जिसकी सुनवाई जुलाई 2014 में हुई थी. इसी सुनवाई में कोर्ट ने रेलवे को प्लेटफॉर्मों की ऊंचाई बढ़ाने का आदेश दिया था।

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