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बेस्ट के कंडेक्टर फिर से वही पुरानी पद्धित से टिकट देंगे। अब तक यात्रियों को ट्राइमैक्स मशीन के द्वारा टिकट दिया जा रहा था लेकन बेस्ट और ट्राइमैक्स कंपनी में विवाद होने के कारण जल्द ही इसे बंद किया जा सकता है और फिर से वही पुरानी पद्धति के अनुसार टिकट दिया जा सकता है।


बीच में ही रद्द हुई ट्राइमैक्स की निविदा 

आधुनिक पद्धति से और कम समय में अधिक यात्रियों को टिकट मिले इसके लिए 2011 में बेस्ट ने ट्राइमैक्स कंपनी को ठेका दिया था। जब इस ठेके की अवधि समाप्त हो गयी तो बेस्ट द्वारा फिर से निविदा निकाली गयी। तब ट्राइमैक्स कंपनी फिर से निविदा भरी और इस बार और भी आधुनिक मशीनों का उपयोग करने का निर्णय लिया गया। इस बार ट्राइमैक्स जिन मशीनों को उपयोग करने वाली थी वह मशीन ई-टिकट के अलावा जीआईएस सिस्टम से भी लैस थी। लेकिन इस निविदा प्रक्रिया को पूरी नहीं करते हुए बेस्ट के महाव्यवस्थापक सुरेंद्र बागड़े ने अपने अधिकारी का प्रयोग करते हुए इस ट्राइमैक्स के आवेदन को निरस्त कर दिया और फिर से पुराने पद्धति के अनुसार टिकट वितरण करने का निर्णय लिया। टिकट छपाई के लिए पौने 2 करोड़ रूपये भी दे दिए गए हैं।


विपक्ष का विरोध 

बागड़े के इस कदम का विरोध विरोधी पक्ष नेता और बेस्ट समिति के सदस्य रवि राजा ने किया है। उन्होंने कहा कि फिर से टिकट की छपाई  करवाना मतलब एक कदम पीछे चलना है।


महाव्यवस्थापक को अपने विश्वास की कंपनी को ठेका देना था लेकिन उसे नहीं मिलने पर किसी को भी यह ठेका नहीं दिया गया। यह एक मनमानी पूर्ण रवैया है। बेस्ट आर्थिक तंगी से गुजर रही है, उसे मजबूत बनाने की जरुरत है।ई-टिकट की तुलना में छपाई किये हुए टिकट की लागत अधिक होती है इसका बाहर बेस्ट पर ही पड़ेगा।

रवी राजा, सदस्य, बेस्ट समिती

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