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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए RTO जाने की जरूरत नहीं

इन सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने से लागत भी बचेगी और नागरिकों का समय और श्रम भी बचेगा। इससे विभाग के काम में सुधार करने में भी मदद मिलेगी क्योंकि इससे करीब 200 अधिकारियों के काम का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए RTO जाने की जरूरत नहीं
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अब वाहन सीखने वालों को ड्राइविंग लाइसेंस (driving license) बनवाने के लिए परिवहन कार्यालय (RTO) जाने की जरूरत नहीं होगी।परिवहन विभाग ने वितरकों के माध्यम से वाहन सीखने वालों को ई-लाइसेंस (e-license) के साथ-साथ नए दोपहिया और चार पहिया वाहनों को ऑनलाइन पंजीकृत करने का एक महत्वाकांक्षी निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray)  ने अद्यतन प्रणाली "सारथी 4.0" के तहत आधार संख्या से जुड़े ऑनलाइन लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस और ऑनलाइन वाहन पंजीकरण प्रणाली का उद्घाटन किया।

राज्य में हर साल 15 लाख से अधिक लर्नर लाइसेंस जारी होते हैं और 20 लाख से अधिक नए वाहन पंजीकृत होते हैं। इस काम में नागरिकों को करीब 100 करोड़ रुपये का खर्च आता है। अब इन सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने से लागत भी बचेगी और नागरिकों का समय और श्रम भी बचेगा। इससे विभाग के काम में सुधार करने में भी मदद मिलेगी क्योंकि इससे करीब 200 अधिकारियों के काम का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, नई तकनीक के माध्यम से महाराष्ट्र में बेहतर सेवाएं प्रदान करने का प्रयास किया जाना चाहिए। सुरक्षित यात्रा के साथ-साथ ऑनलाइन अधिक सेवाएं प्रदान कर आम जनता के समय, धन और श्रम की बचत करने का भी प्रयास किया जाना चाहिए।

साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि, विभाग को तेज और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करते हुए सुरक्षित परिवहन सेवाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

परिवहन सेवा में एक क्रांतिकारी कदम

परिवहन मंत्री अनिल परब (anil parab) ने जनहित में दो ऑनलाइन सेवाओं का शुभारंभ क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि आज के कोरोना प्रकोप के दौरान विभाग को बचाए रखने के लिए वे भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि विभाग के माध्यम से अब तक जनहित की 85 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध करायी जा चुकी हैं।

डिजिटल सेवा

लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑफिस जाने की जरूरत नहीं है। इससे पूर्व मोटर वाहन निरीक्षकों द्वारा नये वाहन पंजीकरण के लिये वाहनों का निरीक्षण किया जा रहा था। इस तरह से वाहनों का निरीक्षण करने की आवश्यकता को अब हटा दिया गया है और नए वाहनों को अब तुरंत वितरक स्तर पर पंजीकृत किया जाएगा।

ई-हस्ताक्षर फॉर्म में डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) का उपयोग करके वाहन वितरक द्वारा सभी दस्तावेज तैयार किए जाएंगे। इसलिए कार्यालय में वाहन या दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आशीष कुमार सिंह ने बताया कि जैसे ही वाहन वितरक टैक्स और फीस भरेंगे, वाहन नंबर जारी कर दिया जाएगा।

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