मेट्रो-3 बन रहा दुःख का कारण

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मुंबई में परिवहन व्यवस्था को और भी उत्तम बनाने के लिए मेट्रो परियोजना की शुरुआत की गयी है। लेकिन जिस तरह से मेट्रो-3 को लेकर विरोध चालू है उससे तो कई लोगों का भविष्य अँधेरे में नजर आ रहा है। जब से मेट्रो-3 परियोजना पास हुई है तब से इसका विरोध ही हो रहा है। कभी मेट्रो-3 के काम से लोगों की नींद उड़ी तो कभी पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। मेट्रो-3 के काम से प्रभादेवी, दादर, माटुंगा, माहिम में कई दूकानदारों की दूकानें बंद हो गयी हैं। जबकि गोखलेरोड पर स्थित कई दूकानदारों के व्यवसाय में भारी कमी आई है। कपड़े की दूकान चलाने वाले स्थानीय दूकानदार भूपेन्द्र गडकरी ने कहा कि दावा किया है कि उनके दूकान के सामने मेट्रो की जो बैरीकैडिंग लगाई गयी है उससे व्यवसाय में 70 फीसदी तक की कमी आई है।

उन्होंने आगे कहा कि इस बैरीकेड से दूकानदारों सहित ग्राहकों को भी आने जाने में परेशानी होती है। जगह कम होने के कारण राहगीर और गाड़ियां एक ही रास्ते से चल रहे हैं जिससे दुर्घटना घटने की भी संभावना बनी हुयी है।

यहां पर स्थित सफारी हाँलीडेज शॉप के मालिक मुकेश हरिया का कहना है कि अभी यह बैरीकेड 5 से 6 साल और रहेंगे तो हमारे धंधा तो पूरी तरह चौपट हो जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारे सामने आत्महत्या करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचेगा। हरिया ने पुनर्वसन की भी मांग की।

पुनर्वसन को लेकर कई दुकानदारों ने एमएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से कई अधिकारी पहुँच से बाहर बताये जा रहे हैं। अधिकारियों के इस रवैये को देखते हुए स्थानीय दूकानदारों ने आन्दोलन करने की धमकी दी है।

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