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पश्चिम रेलवे मानसून का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार, जानें क्या है तैयारी

पश्चिम रेलवे द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि निकट भविष्य में जब कभी मुंबई की जीवन रेखा कहलाने वाली लोकल ट्रेनें अपना सफ़र फिर से शुरू करें, तो मानसून सीज़न के दौरान उपनगरीय खंड का ट्रैक प्रभावित न हो ।

पश्चिम रेलवे मानसून का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार, जानें क्या है तैयारी
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कोरोना महामारी (Coronavirus pandemic) के चलते लागये गए लॉकडाउन ((lockdown) के बाद भी पश्चिम रेलवे (western railway) ने मानसून को लेकर अपनी तैयारी पूरी कर ली है। पश्चिम रेलवे द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि निकट भविष्य में जब कभी मुंबई की जीवन रेखा कहलाने वाली लोकल ट्रेनें अपना सफ़र फिर से शुरू करें, तो  मानसून सीज़न के दौरान उपनगरीय खंड का ट्रैक प्रभावित न हो और मुंबई लोकल ट्रेन की सेवाऍं बिना किसी बाधा के लगातार जारी रह सकें।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी रविन्द्र भाकर के अनुसार प्रतिवर्ष मुंबई उपनगरीय खंड पर भारी वर्षा के कारण रेलवे ट्रैक पर होने वाले जल जमाव के अहम मुद्दे पर विचार करते हुए मानसून सीजन के दौरान सुचारू परिचालन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाये जा रहे हैं। मानसून की तैयारियों के सम्बंध में पश्चिम रेलवे द्वारा उठाये जा रहे कुछ महत्वपूर्ण कदम निम्न प्रकार हैं:-

मानसून 2020 की तैयारियों के लिए उठाये गये महत्वपूर्ण कदम, 

1) मुंबई रेलवे के नालों की 47 किमी नालों की सफाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। साथ ही सम्बंधित निगमों अर्थात एमसीजीएम, एमबीएमसी तथा वीवीसीएमसी के साथ संयुक्त निरीक्षण प्रगति पर है।

2) पम्पिंग क्षमता में वृद्धि करने हेतु इस वर्ष उच्च क्षमता वाले कुल 191 पम्प लगाये गये हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 33% अधिक है।

3) उपनगरीय खंड में 2,58,000 क्यूबिक मीटर कीचड़, कूड़े इत्यादि की सफाई का कार्य पूर्ण किया गया है। इससे मानसून के दौरान सुप्रवाही रूप से बारिश के जल की निकासी में मदद मिलेगी।

4) गोरेगांव - मालाड तथा नालासोपारा - विरार सेक्शन में तीन लोकेशनों पर माइक्रो-टनलिंग से अतिरिक्त जलमार्गों की व्यवस्था की गई है। पिछले मानसून में बाढ़ के बाद इन लोकेशनों की पहचान की गई। इस कार्य के 10 जुलाई, 2020 तक इसके पूरे हो जाने की सम्भावना है। इन अतिरिक्त जलमार्गों से मानसून के दौरान भारी राहत होगी।

5) मानसून में ओएचपी ट्रिपिंग को रोकने हेतु ट्रैक के साथ-साथ लगे हुए 650 वृक्षों की शाखाओं की छॅंटाई की गई।

6) मानसूनी वर्षा में इंसुलेटर की फ्लैशिंग को रोकने हेतु अब तक 5500 इंसुलेटरों की साफ-सफाई की गई। पुलों की फिटिंग की भी जाॅंच की गई, जहाॅं क्लीयरेंस क्रिटिकल है।

7) पश्चिम रेलवे ने अपने ईएमयू उपनगरीय रेकों के मानसून सम्बंधी रखरखाव का कार्य भी शुरू कर दिया है, जिसमें ईएमयू कोचों और उनके विद्युत उपकरणों में सम्भावित रिसाव का पता लगाने और प्लग करने, खिड़कियों और दरवाजों का सुचारू मूवमेंट सुनिश्चित करने जैसे कार्य मुख्य रूप से शामिल हैं। कोचों की छत और इंसुलेटर की सफाई का कार्य भी शुरू कर दिया गया है।

साथ ही निम्न समस्याओं को भी हल किया गया है:

(ए) चर्चगेट - विरार के पूरे सेक्शन और वसई - विरार के महत्वपूर्ण नालों का ड्रोन से सर्वेक्षण किया जा रहा है, जिससे जलमार्ग की बाधाओं और नालों की क्लीनिंग व ड्रेज़िंग पर निगरानी रखी जा सकें।

(बी) भूमिगत नालों  (कल्वर्ट) की साफ-सफाई के लिए सक्शन / डीस्लज़िंग मशीन की व्यवस्था।

(सी) माहिम यार्ड में ट्रैक के आर-पार एच डी पी ई पाइपों की व्यवस्था की गई है, जिससे यार्ड से वर्षा के जल की शीघ्र निकासी हो सके।

इसके अलावा रेलवे स्टेशनों, आसपास के विचरण क्षेत्रों, सभी कोनों में, अलग-थलग पड़ी जगहों से कूड़ा - कचरा हटाया जायेगा। साथ ही ट्रैक एरिया, खुली नालियों एवं सीसी एप्रन आदि जो भी हाउसकीपिंग ठेके में शामिल हैं, उनकी नियमित साफ-सफाई की जायेगी। प्लेटफॉर्मों, कॉनकोर्स एरिया, पैदल उपरी पुल, कस्टमर इंटरफेस एरिया, प्रतीक्षालय, शौचालय एवं कैटरिंग यूनिटों की शीघ्र सफाई करने पर भी  मुख्य रूप से ध्यान रहेगा। रेल परिसर को गंदगी मुक्त रखने और प्लास्टिक का उपयोग न करने के बारे में लोगों से अपील करते हुए नियमित घोषणाऍं की जायेंगी। सभी मंडलों को निर्देश दिये गये हैं कि वे निर्बाध टिकटिंग सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बारिश के पानी, रिसाव और सीवेज से एटीवीएम, सीओटीवीएम, ओसीआर को क्षतिग्रस्त न होने देने के लिए उन्हें सुरक्षित करने के सम्बंध में आवश्यक व्यवस्था करें।

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