अजय देवगन ने भरी हामी, सिंघम, सिंबा और सूर्यवंशी एक साथ एक ही फिल्म में आएंगे नजर

अजय देवगन ने कहा, मैं उस तरह का कोई मैथड एक्टर नहीं हूं कि किरदार में घुसा पड़ा हूं, किरदार से बाहर ही नहीं निकल पा रहा। शॉट जैसे पूरा होता है मैं किरदार से बाहर निकल जाता हूं।

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एक्शन, सस्पेंस-थ्रिलर, रोमांटिक, कॉमेडी से लेकर हरेक जॉनर में खुद को आजमाने और उसमें सफल रहे एक्टर अजय देवगन जल्द ही लव रंजन की फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ में नजर आने वाले हैं। यह एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म हैं, इसमें अजय के साथ रकुल प्रीत सिंह और तब्बू नजर आने वाली है। खास बात यह है कि इस फिल्म में अजय देवगन अपनी ही उम्र के यानी 50 के व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं, जिसे एक 26 साल की लड़की से प्यार हो जाता है। फिल्म 17 मई को रिलीज होगी। रिलीज से पहले अजय देवगन ने मुंबई लाइव से खास मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने निजी और फिल्म से जुड़े सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।

जितनी आपकी असल उम्र है, उतनी ही उम्र को पर्दे पर उतारना आसान या कठिन?

ये कठिन क्यों होगा? सारी दुनिया को पता है कि हमारी उम्र क्या है। हर किसी के बर्थडे के समय खबर छपती है कि अक्षय इतने के हो गए, अजय इतने के हो गए और इसमें गलत क्या है।

उम्र को आप कैसे देखते हैं? 

उम्र एक नंबर है और आपका माइंडसेट है। मेरा बेटा (युग) भी बोलता है कि उम्र को हमने (इंसान) बनाया है। नंबर भी हमने बनाए हैं, उसी के हिसाब से हम उम्र भी गिनते और बनाते हैं। यह एक बायलॉजिकल चीज भी है कि आपने खुद के कितने साल का मान लिया है। 60-65 साल के लोग भी जवान दिखते हैं और कुछ कम उम्र के भी अपनी उम्र से बहुत अधिक के दिखते हैं। अगर आप सही दिनचर्या व खानपान का ध्यान रखते हैं। तो आप हमेशा जवान ही बने रह सकते हैं।

  

फिल्म के टाइटल से जाहिर होता है कि यहां प्यार में फोर्सबाजी है? क्या प्यार में फोर्सबाजी होना जायज है?

प्यार में फोर्सजाबी तो हो ही नहीं सकती और नाही होनी चाहिए। हमारी फिल्म में भी फोर्सबाजी बिलकुल भी नहीं है। पर पता नहीं आपको ऐसा क्यों लग रहा है। शायद आपने फिल्म के टाइटल (दे दे प्यार दे) को गलत तरीके से समझा है।

 

इस फिल्म से तब्बू कैसे जुड़ीं, क्या आपने उन्हें बुलाया?

मैंने रिकमंड तो नहीं किया पर मैंने फिल्म की कहानी सुनी और मुझे काफी पसंद आयी। मैंने तब्बू को फोन कर के बोला एक कहानी आयी है तू सुन ले अगर तुझे पसंद आए तो कर ले। यह अक्सर होता रहता है।   


एक तरफ आप दे दे प्यार दे जैसी रोमांटिक-कॉमेडी और दूसरी तरफ तानाजी जैसी इंटेस फिल्म करते हैं, खुद को बैलेंस कैसे करते हैं

मैं उस तरह का कोई मैथड एक्टर नहीं हूं कि किरदार में घुसा पड़ा हूं, किरदार से बाहर ही नहीं निकल पा रहा। शॉट जैसे पूरा होता है मैं किरदार से बाहर निकल जाता हूं।

क्या सिंघम, सिंबा और सूर्यवंशी एक साथ किसी फिल्म में नजर आएंगे ?

अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी होगी, पर इतना जरूर कहता हूं कि शायद हां।


ट्रोल्स को कैसे देखते हैं

हर किसी के अपने अपने विचार हैं। हर चीज पर हम रिएक्ट करने लगें उसपर ध्यान देनें लगें तो और कुछ तो कर ही नहीं पाएंगे। कई बार बिना वजह के लोग ट्रोल करते हैं। मुझे लगता है कि जो ऐसी ट्रोलिंग करते हैं उनका माइंडसेट ही अजीब सा होता होगा।

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