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श्रद्धा कपूर ने एक गर्भवती हाथी की हत्या के बाद उठाया यह कदम

इस हफ्ते की शुरुआत में, एक भयावह घटना सामने आई थी, जहां केरल में कुछ लोगों ने एक गर्भवती हाथी को पटाखों से भरा एक अनानास खिलाकर उसकी हत्या कर दी थी। इस घटना से जो लोग नाराज लोगो में श्रद्धा कपूर का नाम भी शामिल है।

श्रद्धा कपूर ने एक गर्भवती हाथी की हत्या के बाद उठाया यह कदम
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इस हफ्ते की शुरुआत में, एक भयावह घटना सामने आई थी, जहां केरल में कुछ लोगों ने एक गर्भवती हाथी को पटाखों से भरा एक अनानास खिलाकर उसकी हत्या कर दी थी। इस घटना से जो लोग नाराज लोगो में श्रद्धा कपूर का नाम भी शामिल है।

पशुओं की सहायता और सुरक्षा के लिए काम करने वाले विभिन्न संगठनों और जानवरों की सुरक्षा के लिए मुखर रहने वाली, श्रद्धा ने अपने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को संबोधित  किया है।

सोशल मीडिया पर अपनी व्यापक पहुंच और प्रभाव का उपयोग करते हुए, श्रद्धा ने क्रूरता के खिलाफ सख्त कानून लागू करने के लिए एक याचिका के बारे में जानकारी भी साझा की है। अभिनेत्री ने साझा किया,“हमें पशु क्रूरता के खिलाफ सख्त कानूनों की आवश्यकता है। यह अब बेहद ज़रूरी है। कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें। ”

चिड़ियाघर पर प्रतिबंध लगाने के बारे में जागरूकता बढ़ाने से ले कर सड़कों पर रहने वाले जानवरों की मदद करने तक, श्रद्धा कपूर 'पशु कल्याण और अधिकार' के लिए ध्वजवाहक बन गयी हैं। अभिनेत्री ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय पशु अधिकार संगठन के साथ मिलकर चिड़ियाघर में जानवरों के साथ होने वाले कठोर उपचार को हाईलाइट किया था।


श्रद्धा ने भी अपने इंस्टाग्राम पर इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है,

"एक गर्भवती हाथी को केरल में अज्ञात लोगों द्वारा पटाखों से भरा अनानास खिलाया गया है, जो उसके मुंह में विस्फोट हो गया और उसका जबड़ा क्षतिग्रस्त हो गया है। वह गाँव में घूमती रही और आखिरकार एक नदी में खड़े-खड़े गुजर गई।

हम राक्षसों की तलाश करते हुए उम्मीद करते हैं कि उनके सिर पर शैतान के सींग होंगे। लेकिन अपने चारों ओर देखो, ये शैतान तुम्हारे आस-पास चलते हैं।

आवारा कुत्ते पर पत्थर फेंकने वाले से लेकर जीवित आत्मा को चोट पहुँचाने तक, एक व्यक्ति को चुनो।

इनमें से बहुत से जानवर इंसानों पर भरोसा करते हैं क्योंकि अतीत में उनके द्वारा मदद की गई होती है।

यह क्रूरता माप से भी परे है। जब आपके पास सहानुभूति और दया की कमी होती है, तो आप इंसान कहलाने के लायक नहीं होते। किसी को चोट पहुँचाना मानवीय नहीं है।

इसमे सिर्फ़ सख्त कानून मदद नहीं करेगा। हमें कानून का भी सभ्य निष्पादन चाहिए।

जब तक दोषियों को सबसे खराब तरीके से दंडित नहीं किया जाता है, तब तक यह दुष्ट राक्षस कानून से कभी नहीं डरेंगे।"

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