SBI ने नोटबंदी के दौरान ओवरटाइम के मुआवजे के मांगा वापस


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सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने 70,000 कर्मचारियों (पूर्व सहयोगी बैंकों के) से कहा है कि वो उस मुआवजे को वापस करें जो उन्हें नोटबंदी के दौरान ओवरटाइम करने के एवज में मिला था। नोटबंदी की घोषणा 8 नवंबर 2016 को की गई थी। जिसके बाद एसबीआई ने अपने कर्मचारियों को नोटबंदी के दौरान काम करने के लिए ओवरटाइम दिया था।

14-14 घंटे तक काम करना पड़ा था काम
नोटबंदी की अवधि के दौरान बैंक कर्मचारियों को दिन में 14-14 घंटे तक काम करना पड़ा था। यह स्थिति नोटबंदी के बाद अगले तीन महीने तक देखने को मिली थी। इस दौरान काफी सारे कर्मचारियों की छुट्टियां भी कैंसिल कर दी गई थी क्योंकि पुराने नोट बदलवाने के लिए सरकार की ओर से लोगों को सीमित समय दिया गया था।

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एसबीआई ने अपने जोन्स को निर्देश दिए हैं कि उन कर्मचारियों से एक्स्ट्रा भुगतान वापस लिया जाए जो पहले स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर में काम करते थे।

नोटबंदी के दौरान एसोसिएट बैंकों का विलय एसबीआई में नहीं

एसबीआई ने अपने सभी जोनल हेडक्वार्टर को पत्र लिखकर कहा है वो सिर्फ अपने कर्मचारियों को ओवर टाइम का पैसा देने के लिए उत्तरदायी है। पूर्व एसोसिएट बैंकों के कर्मचारियों से ओवर टाइम भुगतान की रकम वापस ली जाए, क्योंकि नोटबंदी के दौरान एसोसिएट बैंकों का विलय एसबीआई में नहीं हुआ था और उनके कर्मचारी को अतिरिक्त काम के लिए भुगतान देने की जिम्मेदारी एसबीआई की नहीं।

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