मुंबई अब नहीं डूबेगी, बीएमसी अपनाएगी जापानी मॉडल

सोमवार को जापान से संबंधित संस्था के कुछ अधिकारी और इंजीनियर मुंबई आये हुए थे। उन्होंने इस बाबत बीएमसी कमिश्नर प्रवीण परदेशी से मुलाकात की और योजना की रुपरेखा सामने रखी।

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जापान की तर्ज पर अब बीएमसी भी भूमिगत वाटर टनल बनाएगी। इन वाटर टनल का उपयोग बारिश के पानी को जमा करने के लिए किया जाएगा और इसके बाद इसे समुद्र में छोड़ा जाएगा, ऐसा इसीलिए ताकि तेज बारिश में मुंबई की सड़कों और नीचले इलाकों में  पानी जमा न होने पाए।  

जापानी इंजीनियर बनाएंगे रिपोर्ट 
सोमवार को जापान से संबंधित संस्था के कुछ अधिकारी और इंजीनियर मुंबई आये हुए थे। उन्होंने इस बाबत बीएमसी कमिश्नर प्रवीण परदेशी से मुलाकात की और योजना की रुपरेखा सामने रखी। अब ये जापानी अधिकारी और इंजीनियर मुंबई और उसके आसपास स्थित तालाबों, नदियों और पानी जमा होने वाले इलाकों का अध्ययन करेंगे और अपनी एक रिपोर्ट बनाएंगे।

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जापान का मॉडल होगा सफल?
आपको बता दें कि जापान चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है, वहां की भौगोलिक स्थिति कुछ इस तरह से है कि वहां बारिश भी जोरदार होती है। लेकिन जापान ने अपनी तकनीकी के माध्यम से कुछ इस तरह की व्यवस्था की है कि वहां पानी जमा नहीं होने पाता। टोक्यों शहर में जमीन के नीचे बड़े बड़े टनल बनाए गये हैं, उन टनल में बारिश का पानी जमा किया जाता है, इसके बाद जब बारिश रुक जाती है तो टनल में जमा पानी को समुद्र में छोड़ दिया जाता है।

इसी मॉडल को अब बीमसी भी अपनाना चाहती है, अगर यह मॉडल मुंबई में सफल हुआ तो यह बीएमसी के लिए एक बड़ी उपलब्धी होगी और मुंबईकरों के लिए बहुत बड़ी राहत। इस मॉडल को मूर्त रूप देने के लिए बीएमसी की मदद जापान की एजेंसी 'जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेटिव एजेंसी' करेगी।  

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