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लापता हुए कोरोना मरीज की लाश 14 दिन बाद अस्पताल के शौचालय में मिली

अक्सर टीबी के मरीज अस्पताल से भाग जाते हैं और ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं, इसलिए उस समय किसी ने गंभीरता से इस बात को नही लिया।

लापता हुए कोरोना मरीज की लाश 14 दिन बाद अस्पताल के शौचालय में मिली
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मुंबई (mumbai) के शिवड़ी (shivri) में स्थित टीबी अस्पताल (TB hospital) से एक इंसानियत को तार-तार कर देने वाली घटना सामने आई है। इस अस्पताल से कोरोना (Covid) का एक मरीज पिछले 14 दिनों से लापता था, लेकिन अब उस मरीज की डेडबॉडी अस्पताल के शौचालय से मिली है। शिवड़ी के इस टीबी अस्पताल में इस समय कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अस्पताल की इस लापरवाही के कारण BMC ने इस संबंध में जांच का आदेश दिया है।

अस्पताल प्रशासन को शिकायत मिली कि अस्पताल के शौचालय में से काफी तेज दुर्गंध आ रही है। जब सफाईकर्मी शौचालय साफ करने गए तो उनके होश फाख्ता हो गये। शौचालय में काफी क्षत विक्षत अवस्था में एक लाश पड़ी हुई थी। लाश इतनी खराब हो चुकी थी कि, यह पता लगाना मुश्किल था कि, लाश किसी पुरुष की है या महिला की?

इसलिए, लाश की पहचान करने के लिए जब अस्पताल में भर्ती मरीजों के दस्तावेजों (रिकॉर्ड) की जांच की गई तो पता चला कि कोविड से पीड़ित एक मरीज लापता था। लापता मरीज का नाम सूर्यभान यादव (27) था, जो 4 अक्टूबर से ही अस्पताल से गायब था।

हालांकि, अक्सर टीबी के मरीज अस्पताल से भाग जाते हैं और ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं, इसलिए उस समय किसी ने गंभीरता से इस बात को नही लिया। 

रिकॉर्ड के मुताबिक कोरोना पोज़िटिव आने के बाद सूर्यभान यादव को 30 सितंबर को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें गोरेगांव के एक डॉक्टर ने यहां रेफर किया था। अस्पताल में भर्ती होने पर यादव ने अपना पता नहीं दिया था। जिस वार्ड में यादव थे, वहां कुल 11 मरीज थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि, शौचालय जाने के बाद सांस लेने में तकलीफ के कारण सूर्यभान यादव की मौके पर ही मौत हो गयी।

BMC ने अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के भी आदेश दे दिए हैं।  साथ ही, वार्ड में काम करने वाले लगभग 40 कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किया गया है।

इसके अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा 22 अक्टूबर, 2020 को एक समिति भी गठित की गई है। उप-कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी (विशेष अस्पताल) की अध्यक्षता वाली सात-सदस्यीय समिति को तीन से चार दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।  

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