Save Aarey: 'सिर्फ पेड़ ही नहीं काटेंगे बल्कि दुर्लभ जंतुओं के अस्तित्व भी खतरे में आ जाएगा'

रविवार को भी लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर पेड़ों को काटे जाने का विरोध जताते हुए रैली निकाली और 'आरे बचाओ, मुंबई बचाओं' का नारा दिया।

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मुंबई में गोरेगांव उपनगर में स्थित आरे कॉलोनी के जंगलों में मेट्रो-3 का कारशेड बनाने के लिए सरकार की तरफ से 2 हजार से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दी गयी है, जिसे लेकर कई बड़े-बड़े नेताओं, अभिनेताओं, पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय नागरिक विरोध जता रहे हैं। रविवार को भी लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर पेड़ों को काटे जाने का विरोध जताते हुए रैली निकाली और 'आरे बचाओ, मुंबई बचाओं' का नारा दिया। इस मौके पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले भी मौके पर पहुंच कर पेड़ों का काटे जाने का विरोध जताया।

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इस मौके पर जुटे कई पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों को काटे जाने के लिए विरोध जताया। पर्यावरण प्रेमियों का कहना था कि इस जंगल को काटने से सिर्फ पेड़ ही नहीं काटेंगे बल्कि कई दुर्लभ जीव जंतुओं के अस्तित्व पर भी संकट खड़े हो जाएंगे। इनका कहना था कि आरे अन्य स्तनधारियों जानवरों, पक्षियों, सरीसृप और तितलियों का घर है।

मुंबई में शुद्ध हवा का कोई स्रोत नहीं है, एकमात्र अरे का जंगल ही है जो प्रदूषण को कंट्रोल में रखता है, इसीलिए इसे मुंबई शहर का फेफड़ा भी कहा जाता है।

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आदिवासी और जंगलों के लिए काम करने वाली समिति आदिवासी हक संवर्धन समिती का कहना था कि आरे के जंगल आदिवसियों का जीवन है, कारशेड दूसरी जगह पर भी बन सकता है। सरकार ने हमारी बात मानी तो ठीक नहीं तो हम चिपको आंदोलन करेंगे।

सुप्रिया सुले ने भी स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों से मिलीं और उनसे इस मुद्दे पर चर्चा की, यही नहीं सुप्रिया ने इस मुद्दे को सांसद में भी उठाने और सरकार से बात करने का आश्वासन दिया।

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