महाराष्ट्र सरकार ने राज्य भर में शहरी और ग्रामीण लोकल बॉडीज़ द्वारा किए गए डेवलपमेंट के कामों की मॉनिटरिंग और ऑडिटिंग को मज़बूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जियो-टैगिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया है।(Maharashtra to Introduce AI, Geo-Tagging for Monitoring Local Body Development Projects)
नया सिस्टम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, म्युनिसिपल काउंसिल, नगर पंचायत और दूसरे लोकल सेल्फ़-गवर्नमेंट इंस्टीट्यूशन द्वारा किए जा रहे प्रोजेक्ट्स को डिजिटली ट्रैक करेगा। इसके लिए जियो-टैग्ड फ़ोटोग्राफ़ और AI-बेस्ड वेरिफ़िकेशन का इस्तेमाल करके कामों की प्रोग्रेस और पूरा होने पर नज़र रखी जाएगी।
इस पहल का मकसद पब्लिक इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लागू करने में ट्रांसपेरेंसी, अकाउंटेबिलिटी और एफ़िशिएंसी में सुधार करना है, साथ ही गड़बड़ियों, डुप्लीकेशन और सरकारी फ़ंड के गलत इस्तेमाल को कम करना है। अधिकारियों ने कहा कि यह टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के कामों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग को मुमकिन बनाएगी, अधिकारियों को दूर से यह वेरिफ़ाई करने देगी कि प्रोजेक्ट्स मंज़ूर किए गए तरीके से पूरे हुए हैं या नहीं, और शुरुआती स्टेज में ही गड़बड़ियों का पता लगाने में मदद करेगी।
AI-इनेबल्ड ऑडिट मैकेनिज़्म से सिविक प्रोजेक्ट्स का एक भरोसेमंद डिजिटल रिकॉर्ड बनने की भी उम्मीद है, जिससे इंस्पेक्शन ज़्यादा असरदार होंगे और पब्लिक रिसोर्स का बेहतर इस्तेमाल पक्का होगा। इस पहल के ज़रिए, राज्य सरकार का मकसद डेवलपमेंट के कामों की मॉनिटरिंग को मॉडर्न बनाना, गवर्नेंस को बेहतर बनाना और लोकल बॉडीज़ द्वारा प्रोजेक्ट्स को लागू करने में जनता का भरोसा बढ़ाना है।
यह भी पढ़ें- मुंबई- ट्री अथॉरिटी ने धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई को मंज़ूरी दी
