ESIC fire: जान पर खेल कर 3 नर्सों ने बचाई 7 शिशुओं की जान

ESIC कामगार अस्पताल में आग लगने से अब तक कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है और घायलों की संख्या 177 तक पहुंच गयी है। यही नहीं मरने वालों में 7 नवजात बच्चे भी शामिल हैं। यह संख्या और भी बढ़ सकती थी अगर 3 नर्सों ने अपनी जान पर खले कर अन्य नवजात बच्चों को न बचाया होता।

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अंधेरी ईस्ट स्थित ESIC कामगार अस्पताल में आग लगने से अब तक कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है और घायलों की संख्या 177 तक पहुंच गयी है। यही नहीं मरने वालों में 7 नवजात बच्चे भी शामिल हैं। यह संख्या और भी बढ़ सकती थी अगर 3 नर्सों ने अपनी जान पर खले कर अन्य नवजात बच्चों को न बचाया होता।

कैसे बची नवजात शिशुओं की जान?
जब इस कामगार अस्पताल में शाम 4 बजे आग लगी तो उस समय ज्योति कांबले, सीमा और प्राची तीसरी मंजिल पर बच्चों के NICU (अतिदक्षता विभाग) में खाना खा रही थीं। ज्योति बताती है कि जब हम लोग मिल कर खाना का रहे थे उसी समय डॉक्टर अजित दौड़ते हुए आये और उन्होंने आग लगने की सूचना देते हुए तुरंत यहां से निकलने को कहा। लेकिन उस समय वहां 7 शिशु भी एडमिट थे, उन्हें छोड़कर निकलना हमें सही नहीं लगा।

ख़ास बात यह थी कि इन 7 बच्चों में 2 बच्चे वेंटिलेटर पर रखे हुए थे और उन्हें छूना मतलब उनकी जान के साथ खिलवाड़ करना होता। इसीलिए हमने 5 बच्चों को बाहर निकालने का फैसला किया, लेकिन धुएं के कारण बाहर निकलने में मुश्किल आ रही थी।  किसी तरह से हमने बच्चों के मुंह पर गीला मास्क रख कर उन्हें किसी तरह से बाहर निकाला।

बाहर निकलने के बाद हमने दमकल कर्मियों को इस बात की सूचना दी कि अभी भी एनआईसीयू में दो बच्चे हैं। इसके बाद तत्काल दमकलकर्मियों ने दोनों बच्चों को रेस्क्यू किया।

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