बीएमसी ने झाड़ा पल्ला, दुर्घटनाओं में मरे हुए लोगों के परिवार को मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं

बीएमसी के बहुत से काम ठेकेदारों के माध्यम से होते हैं। इन विकास कामों के देखभाल की जिम्मेदारी भी ठेकेदारों की होती है। जिसके चलते किसी दुर्घटना में जख्मी या मरे हुए व्यक्ति के परिवार वालों को मुआवजा देने के लिए प्रशासन बाध्य नहीं है।

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सड़क पर गड्ढा निश्चित ही जानलेवा होता है और इनकी वजह से कई परिवार अपने सदस्यों को गवां चुके हैं और आज भी इस तरह की घटनाएं घटती आ रही हैं। पर बीएमसी ने अपनी जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर लिए हैं। इस तरह की दुर्घटनाओं में जान गवांने वाले या जख्मी व्यक्तियों के परिवारवालों को उम्मीद रहती है कि बीएमसी उनकी सहायता करेगा, पर बीएमसी ने इससे पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि इस तरह घटनाओं के बाद बीएमसी नुकसान भरपाई के लिए बाध्य नहीं है।

बीएमसी का अभिप्राय

बीएमसी क्षेत्र की सड़कों के गड्ढों, गटर, मैनहोल में गिरकर जख्मी और मरने वालों की संख्या अधिक है। इस तरह की दुर्घटनाओं में किसी भी व्यक्ति के जख्मी होने या मरने के बाद परिवार वालों को नुकसान भरपाई मिले, इसके लिए बीएमसी द्वारा योजना तैयार की जाए, इस संदर्भ में शिवसेना नगरसेवक अभिषेक घोसालकर की उपस्थिति में बीएमसी सभागृह में मंजूर किया गया था। इसके बावजूद भी बीएमसी ने नुकसान भरपाई करने से मना किया है। उनका कहना है कि इस पर कोई कानूनी नियम नहीं बन सकता।

बीएमसी के बहुत से काम ठेकेदारों के माध्यम से होते हैं। इन विकास कामों के देखभाल की जिम्मेदारी भी ठेकेदारों की होती है। जिसके चलते किसी दुर्घटना में जख्मी या मरे हुए व्यक्ति के परिवार वालों को मुआवजा देने के लिए प्रशासन बाध्य नहीं है। साथ ही इस पर बीएमसी का कहना है कि इसके चलते हम कोई ऑफिशियल कदम नहीं उठा सकते हैं।

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