बीएमसी में ये कैसा भेदभाव

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बीएमसी में ये कैसा भेदभाव

मुंबई - एक तरफ जहाँ सरकार अपनी कटौती में कमी कर रही है और एक ही मंत्री के जिम्मे कई मंत्रालय दे उनकी जिम्मेदारियां बढ़ा रही है तो वहीँ दूसरी तरफ बीएमसी में स्थायी समिति के अध्यक्षों पर पैसा पानी की तरफ बहाया जा रहा है। अब बीमसी के सभागृह नेता सहित विशेष समिति और प्रभाग समिति के अध्यक्षों को अब मोबाइल के लिए अलग से 3 हजार रूपये दिए जाएंगे।

मनपा कमिश्नर अजोय मेहता ने मानव संसाधनों का सम्पूर्ण उपयोग करने और कम खर्च के नाम पर लिपिक, टेलीफोन ऑपरेटरों, लघुलेख के पद रद्द करके इन्हें कार्यकरी सहायकों की श्रेणी में रखा था। साथ ही वाहनचालक, कामगार और अन्य कुछ पदों को ख़त्म करते हुए वाहन चालक ही गाड़ियों की भी देखभाल करने के निर्देश दिए गये थे। यही नहीं कर्मचारियों के ओवर टाइम पर भी प्रतिबंध लगा दिए गये थे। इस सभी कार्यों से बीएमसी को 2525 करोड़ रूपये की बचत हर साल हो रही थी। अध्यक्ष पदों के लिए जहाँ 3 हजार रूपये दिए जा रहे हैं तो वहीँ नगरसेवकों को भी 1100 रूपये मोबाइल के लिए दिए जा रहे हैं। इस निधि को मंजूरी के लिए सचिव विभाग ने आगे भेज दिया है।

सभागृह नेता सहित स्थायी समिती, सुधार समिती, बेस्ट समिती, शिक्षण समिती सहित बीएमसी में कुल 17 प्रभाग समिति है। इस समितियों के अध्यक्षों को चायपानी का खर्च, उनके आने जाने का खर्च, उनका पर्सनल स्टाफ सभी सुविधाएं प्राप्त होती हैं। एक तरफ इन अध्यक्षों को सुविधाओं के नाम पर लाखो खर्च किया जाते हैं तो दूसरी तरफ आम कर्मचारियों का ओवर टाइम भी समाप्त कर दिया गया। जबकि महापौर और उपमहापौर के लिए अनलिमिटेड फोन कालिंग की व्यवस्था की गयी है, इनके भी बिल बीएमसी प्रशासन ही देगा।

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