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स्कूलों का अत्याचार


स्कूलों का अत्याचार
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मुंबई - शिक्षा का जहां व्यवसायीकरण हो रहा है तो वही स्कूलों की फीस भी बढ़ती जा रही है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूल सीबीएस बोर्ड आईसीएसई बोर्ड भी अच्छी शिक्षा के नाम पर लोगों की जेब खाली करने में लगे हैं। एक तरफ इन स्कूलों ने खुलेआम लूट मचा रखी है तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है। लोगों की मानसिकता भी यही है कि अगर हम अपने बच्चों को इंग्लिश स्कूल में नहीं डालेंगे तो बच्चे का भविष्य नहीं बनेगा। इसीलिए इंग्लिश स्कूलों में एडमिशन के लिए इतना लोग परेशान रहते हैं इसी का फायदा स्कूल उठाते हैं। वे अभिभावकों से ड्रेस, बैग, किताब के नाम पर उनसे जी भर कर उगाही करते हैं।

2003 में शिक्षा विभाग ने एक जीआर जारी कर कहा था कि स्कूल अभिभावकों को सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं।बावजूद इसके स्कूल प्रशासन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

नाम न बताने की शर्त पर एक अभीभावक ने मुंबई लाइव को बताया कि स्कूलों के इसी नियम को लेकर अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि स्कूल नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, हमें हर सामान स्कूल से महंगे रेट में खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। इनका कहना है कि ट्यूशन के नाम पर भी ये पैसे एंठते हैं।

पैरेंट्स फोरम के अध्यक्ष जयंत जैन ने कहा कि फीस के नाम पर स्कूल मनमानी ढंग से फीस बढ़ाते हैं। इसके खिलाफ हम हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज कराएँगे।

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