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शिवाजी स्मारक बनने के दौरान बुधवार को हुई एक नाव दुर्घटना की जांच फ़ास्ट ट्रैक से करने का निर्णय लिया गया है। महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि, इस मामले में दोषियों जरूर मिलेगी, इस मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने भेजा जाएगा।

बुधवार शिवाजी स्मारक बनने का काम शुरू हुआ था, आयोजकों ने वहां पर पत्रकारों सहित कुछ अधिकारीयों को भी बुलाया था। लगभग 4 बजे के आसपास जब गिरगांव से एक बोट 25 लोगों को बैठा कर शिवाजी स्मारक बनने वाले स्थान पर ले जा रही थी तभी रस्ते में ही बोट एक पत्थर से टकरा गयी और पलटी हो गयी। गनीमत रही कि एक दूसरी बोट से सभी को बचा लिया गया लेकिन एक व्यक्ति की मौत हो गयी। इस बोट के पत्रकार सहित बड़े बड़े अधिकारी भी थे।

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इस हादसे के बाद सरकार सहित प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि आयोजकों द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गयी थी, बोट पर क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया गया था। यही नहीं कांग्रेस ने तो सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए यहां तक कह दिया कि स्मारक में हो रहे घोटाले को छुपाने के लिए यह हादसा कराया गया, जबकि शिवसेना ने दोषियों पर आपराधिक केस दर्ज करने की मांग कर डाली।  

सरकार की फजीहत देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृतक सिध्देश पवार के घर वालों को 5 लाख रूपये आर्थिक मदद की घोषणा की साथ ही इस मामले के जांच के आदेश दिए, इसके बाद गृह राज्यमंत्री ने मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट से जांच कराने की बात कही।


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