लावारिस और बेसहारा बुजुर्गों के चेहरे पर स्माइल लाती 'स्माइल प्लस फाउंडेशन'

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लावारिस और बेसहारा बुजुर्गों के चेहरे पर स्माइल लाती 'स्माइल प्लस फाउंडेशन'
लावारिस और बेसहारा बुजुर्गों के चेहरे पर स्माइल लाती 'स्माइल प्लस फाउंडेशन'
लावारिस और बेसहारा बुजुर्गों के चेहरे पर स्माइल लाती 'स्माइल प्लस फाउंडेशन'
लावारिस और बेसहारा बुजुर्गों के चेहरे पर स्माइल लाती 'स्माइल प्लस फाउंडेशन'
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बबन सनस लगभग 70 से 75 साल के वृद्ध हैं। बबन का घर है बोरीवली रेलवे स्टेशन। बबन पिछले 5 या 6 साल से यहीं रह रहे हैं। बबन मूल रूप से पुणे के रहने वाले हैं। बताया जाता है कि बबन ने किसी बात पर नाराज होकर घर छोड़ दिया था। तब से बबन का घर रेलवे स्टेशन या फिर सड़क बना हुआ है। बबन पिछले 35 साल से अकेले जीवन बिता रहे हैं।


किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया

बबन ने आज तक भीख नहीं मांगा। जिसने जो दे दिया वही खा लिया, जहां रहे वहीँ सो लिया, बबन की यही दिनचर्या पिछले कई सालों से ऐसी ही चली आ रही थी। लेकिन बबन की तबियत पिछले दो दिनों से ख़राब हो गई है, उनके पैर में सूजन आ गई है। यह देखते हुए एक व्यक्ति प्रसाद चव्हाण ने बबन का इलाज कराने का निर्णय लिया। प्रसाद ने पहले तो बबन को किसी वृद्ध आश्रम में भर्ती कराने की सोची लेकिन उन्होंने ‘‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ के अध्यक्ष योगेश मालखरे को सम्पर्क किया। अब इस फाउंडेशन ने बबन के इलाज की सारी व्यवस्था की है। ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ ने न सिर्फ बबन के इलाज रहने और खाने की व्यवस्था की बल्कि बबन जैसे कई बेसहारा और अनाथ हैं जो ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ की छत के नीचे ख़ुशी और सुखी पूर्वक अपना जीवन निर्वाह कर रहे हैं।




यही नहीं बबन को ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ की राह ले जाने वाले प्रसाद चव्हाण कहते हैं कि मैंने जब ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ का काम देखा तो मैं भी उनके काम से काफी प्रभावित हुआ और मैं भी ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ का एक हिस्सा बन गया।


बबन के घर वालों को ढूंढा जाएगा

इलाज के बाद जब ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ वालो ने बबन से जानकारी इकट्ठा करनी चाही तो उन्हें अपने नाम के और कुछ भी याद नहीं था। और जो कुछ याद भी हैं वो काफी धुंधला धुंधला ही याद था। अब ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ बबन के बताए गये जानकारी के आधार पर ही उनके घर वालों की खोज कर रही है।


बुजुर्गों की करते हैं मदद

प्रदेश भर में काम करने वाली स्माईल प्लस सोशल फाउंडेशन ने पिछले 14 महीनों में सड़कों के किनारे बैठने वाले लावारिस और वेसहारा 286 लोगों को सहारा दिया है। मालखरे कहते हैं कि राज्य भर में लगभग 20 हजार से अधिक बुजुर्ग सड़कों पर रहते हैं, जिनको मदद की जरूरत है। ये लोग सड़कों पर भीख मांग कर जीवनयापन करते हैं। कई लोगों का तो कोई सहारा नहीं होता है। वे आगे कहते हैं कि हम लोग सड़कों किनारे जीवन गुजारने वालों को आश्रमों में पहुंचाते। इस काम के लिए राज्य भर में 235 लोगों की टीम काम करती है।


फेसबुक पेज से जुड़ रहे युवा

संस्था के मुंबई सदस्य प्रसाद चव्हाण ने बतया कि संस्था के फेसबुक पेज़ पर मिली जानकारी के आधार पर भी हम जरुरतमंद लोगों की मदद करते हैं। यही नहीं वे आगे कहते हैं कि संस्था के सदस्य हर वृध्द आश्रम में जाकर वृद्धों के लिए होने वाली व्यवस्था का भी निरिक्षण करते हैं।



रेलवे स्टेशनों पर अधिक लावारिस

मालखरे ने बताया कि लावारिस बुजुर्गों की नासिक, मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर अधिक संख्या रहती है, क्योंकि इन्हें यकीन रहता है कि कोई न कोई यात्री इनकी सहायता जरूर करेगा। मालखरे बताते हैं कि अगर कोई आवारा कुत्ता भी बीमार हो जाता है तो मनपा के लोग उसे भी ले जाकर उसका इलाज करवाते हैं लेकिन इन लावारिस बुजुर्गों के लिए कोई सामने नहीं आता। वे कहते हैं कि अगर किसी को भी कहीं भी कोई लावारिस बुजुर्ग दिखाई देता है तो तत्काल 8485808080/9892056723 इस नंबर पर सम्पर्क करें, ‘स्माइल प्लस फाउंडेशन’ हर तरह की सहायता करेगी।

योगेश मालखरे, अध्यक्ष, स्माईल प्लस फाऊंडेशन


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