• बारिश में न फैले मलेरिया, बीएमसी की रडार पर हैं यह वॉर्ड
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बीएमसी आने वाले मानूसन की तैयारी में लग गयी है। इसके साथ ही बीएमसी का स्वास्थ्य विभाग भी सक्रीय हो गया है। बारिश के मौसम में डेंग्यू, मलेरिया सहित अन्य फैलने वाली बीमारियों को देखते हुए 2030 तक मुंबई को मलेरिया मुक्त करने का निर्णय लिया है। आपको बता दें कि हर साल मानसून में सैकड़ों लोग मच्छरों की वजह से मलेरिया और डेंग्यू जैसी बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।



इन वार्डों पर विशेष ध्यान 
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त कार्यकारी अधिकारी डॉ. संतोष रेवणकर के मुताबिक एफ/दक्षिण, जी/दक्षिण और वार्ड एम में अनेक कन्ट्रक्शन के काम चल रहे हैं और यहां पर जनसंख्या भी अधिक है। इन तीनों वार्ड का बॉर्डर भी एक ही है। अमूमन कन्ट्रक्शन वाले जगहों पर अधिक गंदगी देखने को मिलती है। इसीलिए इन इलाकों में अधिक ध्यान दिया जा रहा है।



स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग 
पिछले साल 2017 में मुंबई में मलेरिया के 6 हजार मरीज सामने आये थे, जबकि मात्र सितम्बर महीने में ही 2 हजार मरीज चिन्हित हुए थे। इस बार ऐसा न हो इसलिए बीएमसी ने पूर्व तैयारी करते हुए सभी वार्डों में डॉक्टर्स, नर्स सहित कर्मचारियों की भी संख्या बढ़ाई और इन्हे ट्रेनिंग भी दे रही है।


हमारा लक्ष्य 2030 में मुंबई को मलेरिया से मुक्त करना है। इस काम में मुंबईकरों को भी साथ आना चाहिए तभी ही यह काम सफल होगा। मलेरिया वाले मच्छर शुद्ध पानी में भी अंडे देते हैं अगर यह पानी तीन चार दिनों तक वैसा ही रहता है तो अंडों में से मच्छर पैदा हो जाते हैं। इसलिए घर के आसपास स्वच्छता रखें और पानी जमा नहीं होने दें।
डॉ. संतोष रेवणकर ,संयुक्त कार्यकारी अधिकारी, बीएमसी

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