निजी स्कूलों को बिजली में मिलने वाली सहूलियत होगी रद्द!

ऊर्जा विभाग ने सभी बिजली आपूर्ति कंपनियों को इस बाबत एक परिपत्रक भी लिखा है।

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एकेडमिक साल 2018-19 के लिए निजी स्कूलों और कॉलेजों के लिए एक बड़ा झटका लेकर आ सकता है। निजी स्कूलों और कॉलेजों के लिए बिजली सब्सिडी को इस साल से वापस ले लिया जाएगा। इस संबंध में, ऊर्जा विभाग ने सभी बिजली आपूर्ति कंपनी बेस्ट , एमएसईबी, टाटा पावर और रिलायंस कंपनियों को एक परिपत्रक भी भेजा है। इस बीच, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए निर्णय के कारण, राज्य भर के निजी स्कूलों और कॉलेजों को अगले महीने बिना अनुदानित बिजली बिल का भुगतान करना होगा।

क्यों खत्म की गई बिजली सहुलियत की कमी

मुंबई के सभी निजी स्कूल सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम, 1950 के तहत पंजीकृत हैं। उन सभी निजी स्कूलों को सामाजिक परिप्रेक्ष्य से बिजली बिल में 9 से 18 प्रतिशत बिजली रियायत दी जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, मुंबई में बड़ी संख्या में निजी स्कूल शुरू किए गए थे। इसके साथ ही निजी स्कूल परिजनों से अलग अलग तरह के फिस मांगते है। जिसके कारण माता पिता पर महंगाई की और भी बोझ बढ़ती जाती है।

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सरकार का कहना है की जहां एक ओर निजी स्कूल अलग अलग फिस के नामों पर परिजनों से पैसे मांगते है तो वहीं दूसरी ओर ये सरकार से बिजली पर रियायत क्यों मांगते है। जिसे देखते हुए सरकार ने बिजली बिल पर मिलनेवाली सहुलियत को अब खत्म कर दिया है।

9 से 18 प्रतिशत छूट छूट

महाराष्ट्र विद्युत टैरिफ अधिनियम, 1958 के तहत, स्थानीय सरकारी निकाय जैसे बीएमसी, जिला परिषद स्कूल, सरकारी कॉलेजों और निजी स्कूलों और कॉलेजों को बिजली रियायत दी जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, राज्य विभाग के ऊर्जा विभाग ने शिक्षा के नाम पर स्कूलों के कारण रियायत रद्द करने का फैसला किया है। महाराष्ट्र विद्युत टैरिफ अधिनियम, 2016 को इस उद्देश्य के लिए लागू किया गया है, निजी स्कूलों और कॉलेजों के लिए 9 से 18 प्रतिशत की रियायत रद्द कर दी गई है।

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सिर्फ निजी स्कूलों की रियायत रद्द

सरकार ने सिर्फ निजी स्कूलों की रियायत रद्द करने का आदेश दिया है। सरकारी कॉलेजों और बीएमसी, नगर पालिका और जिला परिषद स्कूलों के लिए बिजली रियायत बरकरार रखी जाएगी।

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