कॉर्पोरेट कंपनियों के स्कूल खोलने वाले विधेयक का विरोध

इस विधेयक को मंजूर करने के बाद अब मुंबई सहित राज्यों में भी स्कूल शुरू करने के लिए ट्रस्ट स्थापना करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

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शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार के उस विधेयक का विरोध कर रहे है, जिसमें सरकार ने कहा था कि अब राज्य में कॉर्पोरेट कंपनियां भी CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत स्कूल खोल अथवा चला सकती हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस विधेयक से उन स्कूलों को नुकसान होगा जो सरकार के अनुदान पर चल रहें हैं। संगठन का कहना है कि इस विधेयक पर सरकार को फिर से विचार करना चाहिए। आपको बता दें कि इस संबंध में एक विधेयक बुधवार को विधानसभा में मंजूर किया गया। इस विधेयक को मंजूर करने के बाद अब मुंबई सहित राज्यों में भी स्कूल शुरू करने के लिए ट्रस्ट स्थापना करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।


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अनुदान होंगे प्रभावित

शिक्षक परिषद मुंबई उत्तर विभाग के अध्यक्ष अनिल बोरनारे ने इस संदर्भ में कहा कि CSR से सरकारी अनुदान प्रभावित होंगे जिसे कई स्कूल बंद होने और टीचरों का रोजगार छीनने की संभावना बढ़ेगी। बोरनारे ने आगे कहा कि इस अनुदानित स्कूलों में न तो टीचरों को समय पर वेतन मिलता है और ना ही स्कूलों में कोई सुविधा रहती है। कई बार तो विपरीत परिस्थितयों में शिक्षक कार्य करते हैं।


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शिवसेना ने जताया विरोध

इस विधेयक को लेकर शिवसेना विधायक चंद्रदीप नरके, सुभाष साबणे सहित अन्य ने आशंका व्यक्त किया कि अंग्रेजी स्कूलों के सामने मराठी स्कूलों का दर्जा कम होगा। इस पर शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि अन्य स्कूलों के सभी नियम निजी स्कूलों पर लागू होंगें और आठवीं तक के स्कूल में तक अनिवार्य विषय होगा। गौरतलब है कि CSR के तहत मुंबई के बाहर स्कूल खोलने के लिए एक एकड़ जमीन जबकि मुंबई में 500 मीटर जगह अनिवार्य शर्त है।

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