मेट्रो-3 की राह में रोड़ा बनेगा 100 साल पुराना पेड़?


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मेट्रो-3 (कुलाबा-बांद्रा-सीप्ज) योजना शुरू से ही विवादों के घेरे में घिरी है। कभी पेड़ काटने को लेकर तो कभी पुरानी इमारतों के नुकसान को लेकर इसे हमेशा इसे कोर्ट में घसीटा जाता है। अब एक बार फिर से इसके काम को लेकर एक टीचर ने आपत्ति जताई है। मेट्रो-3 कामा हॉस्पिटल के सामने एक पेड़ को काटना चाहती है लेकिन टीचर का कहना है कि यह पेड़ 100 साल पुराना है और अत्यंत ही दुर्लभ प्रजाति का है। टीचर के अनुसार वे इस पेड़ को बचाने के लिए कोर्ट की भी शरण ले सकते हैं।

क्या है मामला

कामा हॉस्पिटल के सामने मेट्रो-3 के स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। यहां एक पेड़ है जो स्टेशन के प्रवेश द्वार पर फुटपाथ पर स्थित है। इस पेड़ को आज नहीं तो कल काट ही दिया जाएगा। लेकिन सेंट जेवियर में वनस्पति शास्त्र पढ़ाने वाले एक टीचर का कहना है कि यह पेड़ अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का है और वे इसे कटने नहीं देंगे।

किस चीज का है पेड़ 

बरगद और पीपल के जैसा दिखने वाला यह पेड़ न पीपल का है और ना ही बरगद का, फिर किस चीज का है? इस सवाल पर टीचर राजेंद्र शिंदे कहते हैं कि इस पेड़ का नाम अंग्रेजी नाम फाइकस वायरंस है। शिंदे के अनुसार यह पेड़ 100 साल पुराना है जो सब जगह नहीं पाया जाता। शिंदे आगे कहते हैं कि यह पेड़ पर्यावरण और वनस्पति शास्त्र की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।

नहीं कटने देंगे पेड़ को

शिंदे कहते हैं कि जब उन्हें पता चला कि यह पेड़ काटने वाला है तो उन्हें काफी हैरानी हुई। उनके अनुसार यह पेड़ इतना महत्वपूर्ण है कि इस पेड़ को काटने की अनुमति वृक्ष प्राधिकरण कैसे दे सकता है? मुंबई लाइव से बात करते हुए शिंदे ने कहा कि उन्होंने इस बारे में मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) से बात की तो उसके अधिकारीयों ने पेड़ नहीं काटने का आश्वासन दिया, लेकिन उनके आश्वासन पर शिंदे को भरोसा नहीं है वे लिखित में चाहते हैं जिसके लिए MMRCL तैयार नहीं है।

जाऐंगे कोर्ट...

शिंदे के अनुसार अगर इस पेड़ को काटने का निर्णय MMRCL ने पीछे नहीं लिया तो वे कोर्ट भी जाएंगे। उनके अनुसार एक एक पेड़ हिअ तो क्या हुआ इसे बचाने के लिए उनसे जो बन पड़ेगा वह करेंगे।








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