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वक्त रहते संभल जाएं, प्लास्टिक बाढ़ और गंभीर बीमारियों को देती है जन्म

दुनिया भर में 500 अरब प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल होता है। प्लास्टिक को पूरी तरह से नष्ट होने में 1 हजार साल लगते हैं। अगर यह नष्ट नहीं हुई तो हमें नष्ट कर देगी।

वक्त रहते संभल जाएं, प्लास्टिक बाढ़ और गंभीर बीमारियों को देती है जन्म
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आज विश्व पर्यावरण दिवस है, आज के दिन नेता से लेकर बिजनेसमैन, बॉलीवुड सेलिब्रिटी और आम आदमी नए पेड़ लगाएंगे, पुराने पेड़ों की सुरक्षा का इंतजाम करेगें, प्लास्टिक के खिलाफ अभियान छेड़ेंगे, लोगों को प्लास्टिक के कुप्रभावों के विषय में जाकरुक करने के लिए रैली का आयोजन भी होगा। पर कल से क्या होगा? आप जानते हैं कि क्या होता आया है। पर हम अब पिछली बातें दोहराएंगे नहीं, इस बार हम कमजोर नहीं पड़ेगे इस ओर दिल से जुड़ेंगे और अपने शहर देश और ब्रम्हांड को प्रदूषण मुक्त बनाएंगे। हमारे इस कदम की पर्यावरण को नितांत आवश्यक्ता है।


बाढ़ और बीमारियों को बढ़ाती प्लास्टिक

पिछले साल ही मुंबई ने बाढ़ का सामना किया और इसके लिए बड़े पैमाने पर प्लास्टिक जिम्मेदार निकली। प्लास्टिक की वजह से गटर के ढक्कन जाम हो जाते हैं पानी निकलना बंद हो जाता है। इस प्लास्टिक से मुंबई के बीच ढके नजर आते हैं। जिसे मछलियां खाकर मर रही हैं और पानी गंदा हो रहा है जो बीमारियों को जन्म दे रहा है। सरकार ने प्लास्टिक बैग्स बैन किया। बीच साफ करने का काम शुरु किया। पर हमने क्या किया? क्या हमने प्लास्टिक का उपयोग करना बंद कर दिया है? या कम कर दिया? हमें इस ओर सोचना होगा कि हम जो कर रहे हैं वह घूम फिरकर हमारे पास ही आने वाला है और हमें ही बीमार करने वाला है।


500 अरब प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल  

हमारा देश ही नहीं पूरी दुनिया में प्लास्टिक का उपयोग बहुत ज्यादा बढ़ा है। अगर आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में 500 अरब प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल होता है। आपको जानकर हैरानी होगी की प्लास्टिक को पूरी तरह से नष्ट होने में 1 हजार साल लगते हैं। यानी की अभी तक जितना भी प्लास्टिक बना है वह नष्ट नहीं हो सका है। अगर इसका उपयोग कम नहीं होगा तो यह हमें नष्ट कर देगी। लोग सोचते होंगे कि प्लास्टिक को जलाकर नष्ट किया जा सकता है, तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। प्लास्टिक को जलाने से उसमें से और भी जहरीली गैस निकलती हैं, जो बेहद खतरनाक हैं और कई सारी बीमारियों को न्यौता देती हैं।  


शहर को समझें अपना घर

जब तक हम अपने शहर, देश, ब्रम्हांड को अपने घर की तरह नहीं देखेंगे, तब तक हम सच्चे अर्थों में जागरुक नहीं होंगे। क्योंकि जिस तरह से हमें अपना घर साफ सुथरा रखना अच्छा लगता है, वैसे ही शहर देश और पूरे ब्रम्हाड को साफ सुथरा प्रदूषण मुक्त रखना हमें अच्छा लगने लगेगा और हमें यह करके शांति और सुकून मिलेगा। इस तरह की सोच हरेक व्यक्ति के भीतर होनी चाहिए। अरे भाई कुछ लोगों का ये भी तर्क होगा कि मैं तो अपने घर को भी साफ सुथरा नहीं रखता तो मेरे लिए शहर और देश क्या है? फिर ऐसे लोगों का तो कुछ नहीं हो सकता। बस ऐसे लोगों के घर जाकर बीएमसी फाइन मारे।


आपके सहयोग की जरूरत


लगातार बढ़ रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए सिर्फ सरकारी प्रयासों की नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। प्रत्येक व्यक्ति को इस प्रदूषण से निपटने के लिए अपना सहयोग देना होगा और पर्यावरण प्रदूषण को रोकना होगा। अपने आस पास स्वच्छता रखनी होगी। अधिकाधिक पौधे रोपित करने के साथ साथ उनके पौधों के संरक्षण का संकल्प भी लेना होगा। साथ ही प्लास्टिक का उपयोग कम से कम कम करना होगा। साथ ही प्लास्टिक का रियूज अधिक बढ़ाएं। इस तरह से आप अपने शहर, देश और ब्रम्हांड को प्रदूषि होने से बचा पाएंगे।



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