आश्विन मास की कोजागरी पूर्णिमा

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    आश्विन मास की कोजागरी पूर्णिमा
    मुंबई  -  

    नवरात्रि के बाद आश्विन मास की पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा कहते हैं। वैसे हर महीने में पूर्णिमा आती है, लेकिन कोजागरी पूर्णिमा का महत्व उन सभी से कहीं अधिक है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है। इस दिन दान और स्नान का विशेष महत्व होता है। कहते हैं कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती है और जो जाग रहा होता है वहां ठहरती हैं। कुछ लोग इस दिन कोजागरी व्रत रखते हैं। इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन धन वैभव बढ़ाने के लिए मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा भी की जाती है। इस दिन गाय के दूध की खीर बनाकर माता लक्ष्मी एवं कुबेर को अर्पित कर चांदनी रात में घर के बाहर या छत पर सिद्ध करने के लिए रखी जाती है। इसके बाद सुबह पूरे परिवार में इसे प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी को चांदी का चौकोर टुकड़ा चढ़ाकर फिर उसे अपने पास सालभर रखने से धन की वृद्धि होती है। इस दिन भगवान शिव को गाय के दूध से बनी खीर अर्पित करें।

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