World VadaPav Day- जानिये आखिर कैसे शुरु हुआ वड़ा पाव!

वड़ापाव का जन्म मुंबई में ही हुआ

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आज विश्व वड़ापाव दिवस है यानी की आज ही के दिन लोगों ने पहली बार वड़ा पाव का स्वाद चखा था। मुंबई में शुरु होनेवाला वड़ापाव आज पूरी दुनियां में मशहुर हो गया है। मुंबईयां जबान में  वड़ा पाव को मुंबई को राष्ट्रीय खाना भी बोला जाता है।  मुंबई में रहनेवाले और काम करनेवाले लगभग सभी लोगों ने वड़ापाव का स्वाद चखा है।  कई लोग तो सिर्फ वड़ा पाव खाकर ही अपनी दिन निकाल लेते है।  लेकिन क्या आप जानते है की आखिर वड़ा पाव आया कहा से और कैसे इसकी शुरुआत हुई?

माना जाता है कि वाडापव का जन्म1966 में दादर स्टेशन के बाहर अशोक वैद्य के  भोजन की गाड़ी पर पहली बार वड़ापाव बना था।  इस अवधि के दौरान, दादर में सुधाकर म्हात्रे के वाडापाव की शुरुआत हुई। केवल आलू की सब्जी और रोटी खाने के बजाय लोगों ने  बेसिन में तेल में तल कर वड़ापाव खाने की शुरुआत की।  धीरे धीरे लोगों को वड़ापाव का स्वाद इतना पसंद आने लगा की मुंबई के कोने कोने में वड़ापाव बनने लगा। मुंबई में जिस समय वड़ापाव बिकना शुरु हुआ उस समय उसकी किमत सिर्फ 10 पैसे थी।

मुंबई के दादर, लालबाग, पारल और गिरगाँव में मिल श्रमिकों के कारण, यह सरल पदार्थ 'मुंबई का प्रसिद्ध वाडापव' बन गया।

कैसे बना वड़ापाव इतना बड़ा

1970 से 1980 की अवधि में मुंबई में मिलें बंद होने लगीं, कई युवाओं ने रोजगार और भुगतान के साधन के रूप में वाडापावन के वाहन को खोलना शुरु कर दिया। जिसके बाद मुंबई की गली गली में वड़ापाव की गाड़ियां देखने को मिलने लगी।  इस दौरान शिवसेना ने मुंबई में दक्षिण भारतीयों को खिलाफ आंदोलन शुरु किया था। जिसके कारण कई शिवसैनिको ने दक्षिण भारतीय खाना छोड़कर वड़ापाव खाने का रुख किया। 

शिवसेना ने भी लोगों से अपील कि की मराठी लोगों का समर्थन करने के लिए वह दक्षिण भारत के खाद्यपदार्थ को खाने की बजाट वड़ा पाव खाए। जिसके कारण वड़ा पाव की बिक्री मुंबई और आसपास के इलाको में बढ़ गई। शिवसेना ने शिव वड़ापाव की भी शुरुआत की।

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