रसीला आम लेकिन जहरीला काम

 Mumbai
रसीला आम लेकिन जहरीला काम

मुंबई – बाजार में बिक रहे पीले और रसीले आम को देखकर आपके मुंह में पानी आना स्वाभाविक है। लेकिन क्या आपको पता है कि इन रसीले आम के साथ आप जहर भी अपने पेट में पहुंचा रहे हैं। वह भी ऐसा जहर को आपको कैंसर जैसी गंभीर बीमारी दे सकता है। आप के आंखों की रोशनी छीन सकता है। ऐसा हम नहीं बल्कि एफडीए की एक चेतावनी कह रही है।

बाजारों में आम की आवक भी बढ़ रही है और लोगों की मांग भी। इसी मांग को देखते हुए कच्चे आमों को भी रसायनों से पका कर उसे लोगों को बेचा जा रहा है। फलों को पकाने के सबसे आम तरीका है कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग। इससे पके फल, खासतौर से आम इन दिनों मुंबई के कोने- कोने में बिक रहा है। इनको लोग बड़े चाव से खा भी रहे हैं। इन फलों को खाने से गंभीर बीमारी हो सकती है। इसी वजह से कार्बाइड की सेलिंग पर बैन है। लेकिन इस बैन का कोई असर नहीं है। कई स्थानों पर तो खुलेआम कार्बाइड बिक रहा है।

 

अप्रैल-मई महीने में बाजारों में अधिक आम की आवक होती है इस पर हमारी विशेष नजर है। हम आम के नमूने लेकर जांच करेंगे, अगर कुछ गलत होता है तो हम उसपर कार्रवाई करेंगे- सुरेश अन्नपुरे, सहायक आयुक्त, एफडीए 

डेली पहुंच रहे मार्केट में आम

  1. - कार्बाइड का सबसे अधिक इस्तेमाल आम पकाने के लिए किया जाता है।
  2. - इस वक्त आम का सीजन है। मंडी में डेली बड़ी संख्या में आम से लदे ट्रक पहुंच रहे हैं।
  3. - महाराष्ट्र, केरल आंध्रप्रदेश, गुजरात से लगभग डेली 50 से 60 ट्रक आ रहे हैं.
  4. - इसके साथ ही पांच से दस ट्रक आम मंडी में पहुंच रहे हैं.
  5. - बाहर से आने वाला आम कच्चा होता है।
  6. - अल्फांसो, रत्नागिरी, हापूस , लंगड़ा, दशहरी, चौसा, तोतापरी आदि आम बिक  रहे हैं।
  7. - मंडी में आए कच्चो आम को कार्बाइड से पकाकर मार्केट में बेंचते हैं।


ऐसे पकाते हैं आम

नाम न बताने की शर्त पर एक फल कारोबारी बताते हैं कि पका आम मंगाने पर इसके जल्दी खराब होने का डर रहता है। कच्चे आम को पकाने के लिए एक टोकरी में आम को डाला जाता है। कार्बाइड का थोड़ा टुकड़ा डाला दिया जाता है। फिर टोकरी को अच्छी तरह से पेपर या जूट की बोरी से ढक दिया जाता है। ऐसी कई टोकरी को एक कमरे में रखकर 36 से 40 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद पका आम मार्केट में आ जाता है।

एक अन्य फल व्यवसायी बतातें हैं कि 250 ग्राम कार्बाइड से 35 से 40 किलो आम पकाया जा सकता है। कुछ बड़े व्यापारी आम को बड़े से कमरे में रख देते हैं। कमरे में कार्बाइड की बड़ी मात्रा रख दी जाती है। कमरे को अच्छे से सील कर दिया जाता है। आम पकने के बाद उसे बाहर निकाल लिया जाता है। कार्बाइड से पकाने पर छिलका चटख पीला हो जाता है जिससे आम की सुंदरता भी बढ़ती है।

एक दुसरे फल व्यवसायी के अनुसार नेचुरल तरीके से आम पकने में सात से 15 दिन का वक्त लगता है। इतना वक्त फल को संभालकर रखना मुश्किल होता है। रुपये भी फंसे रहते हैं। आम को कार्बाइड से जल्दी से पकाकर बेच दिया जाता है।


खतरनाक है कार्बाइड

  1. - कार्बाइड से पके आम को खाने से नर्वस सिस्टम खराब हो सकते हैं
  2. - कैंसर जैसी बीमारी कार्बाइड से पके आम खाने से हो सकती है
  3. - कार्बाइड से पके आम खाने से लकवा भी मार सकता है
  4. - कार्बाइड के असर से डायरिया और दस्त आम बीमारी है
  5. - कार्बाइड के असर से पेट दर्द भी होता है
  6. - इसे हाथ से बार- बार छूने वाले को खुजली की शिकायत हो सकती है
  7. - आंखों से टच होने पर रोशनी तक जा सकती है
  8. - इसके निकलने वाली गैस से अधिक देर तक सम्पर्क में रहने वाले के फेफड़े को काफी नुकसान पहुंचता है

ऐसे करें पहचान और बचाव

  1. - कार्बाइड से पके आम चित्तेदार होते हैं
  2. - ऐसे आम के छिलके मामूली सिकुड़न लिये होते हैं
  3. - कार्बाइड से पके आम में नेचुरल टेस्ट नहीं होता है
  4. - आम को अच्छे से पानी में भीगोये बिना नहीं खाएं
  5. - आधा से एक घंटा तक आम को पानी में डुबो कर रखें।
  6. - मार्केट से कच्चा आम लाकर उसे पुराने न्यूज पेपर से ढक कर बंद कमरे में रख दें। लगभग एक सप्ताह या 10 दिन में आम नेचुरल तरीके से पक जाएगा।
  7. - नेचुरल तरीके से पकाया गया आम नुकसान नहीं करता है।

सजा का है प्रावधान 

कार्बाइड और कार्बाइड से पके फल को बेचने पर प्रतिबंध है। एफडीए ने इस पर बैन लगाया गया है। इसे बेचने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे करने वाले को जुर्माना के साथ छह महीने से दो साल तक की सजा हो सकती है।


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