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रेजिडेंट डॉक्टरों के हित में काम करने वाली संस्था मॉर्ड (Maharashtra Association of Resident Doctors) डॉक्टरों से होने वाली मारपीट को रोकने के लिए अब एक अलग से एंटी हैरेसमेंट टीम का गठन करेगा, जिसका काम केवल डॉक्टरों से और नर्सों से होने वाली मारपीट, गाली गलौच और झगड़े को रोकना होगा।


 क्यों उठा यह मुद्दा?

आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल महीने में अमेरिका की एक सर्वे एजेंसी ने सर्वे कर बताया था कि मुंबई के मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाली 30 फीसदी महिलाओं (डॉक्टर, नर्स, सेविका, कर्मचारी) को यौन उत्पीड़न, अश्लील कमेंट्स और गाली गलौच का सामना करना पड़ता है। यही नहीं ठीक इसी तरह की रिपोर्ट कोलकाता की भी एक सर्वे एजेंसी ने प्रस्तुत की जिसमें कहा गया था कि मेडिकल क्षेत्र में कार्यरत 135 महिलाओं में से 77 महिलाओं को इन सारी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है।


बनाया जाएगा एंटी हैरेसमेंट विभाग 
इसके बाद मामले को संज्ञान में लेते हुए मॉर्ड ने राज्य भर के कुछ प्राइवेट और सरकारी डॉक्टरों के साथ बातचीत की, बातचीत के बाद तय किया गया कि मारपीट और झगड़ों को रोकने के लिए एक अलग से एंटी हैरेसमेंट विभाग ही बनाया जाएगा। 

राज्य भर के अस्पतालों, छोटे दवाखानों में कार्यरत डॉक्टरों से मरीजों के परिजन मारपीट करते हैं। इस तरफ से डॉक्टरों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इसीलिए ऐसे डॉक्टरों के समर्थन में उन्हें न्याय दिलाने के लिए एक विशेष 'विभाग' बनाया जाएगा। जो इस तरह  निपटारा करेगा।
- डॉ. लोकेश चिरवाटकर, अध्यक्ष, मार्ड संघटना

गौरतलब है कि आये दिन मरीजों के परिजनों द्वारा डॉक्टरों से मारपीट की घटनाए सामने आती हैं। कई बार डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने आवाज भी उठाई और हड़ताल भी किया। जिसके बाद अब मॉर्ड द्वारा विभाग बनाये जाने की बात की जा रही है।

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