सावधान! होली पर कहीं आप ना हो जाएं रासायनिक रंगों के शिकार

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सावधान! होली पर कहीं आप ना हो जाएं रासायनिक रंगों के शिकार

मुंबई - होली का त्योहार आते ही बाजार विभिन्न रंगों और होली के सामानों भर जाता है। होली में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक रंगों की आड़ में रसायन से बने रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए नागरिकों को रंगों की खरीददारी करते वक्त सावधान रहना चाहिए। ये मिलावटी रंग स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हो सकते हैं। इस साल भी एफडीए बाजार में इस तरह के रासायनिक रंगों पर करीब से नजर रखे हुए हैं। अपर आयुक्त, एफडीए, मुंबई विनीता थॉमस ने सूचित किया है कि एफडीए के परीक्षण के लिए शहर के विभिन्न भागों से नमूने इकट्ठा किया गया है। एफडीए का कहना है कि वह कानूनी दायरे के भीतर काम कर सकतें हैं कुछ मामलों में हमारे हाथ जरूर बंधे होते हैं।

एफडीए का कहना है कि यह रंग औषधी व सौंदर्य प्रसाधन के रूप में वर्गीकृत नहीं हैं। इसलिए एफडीए इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती है। एफडीए ने जनता से अपील की है कि प्राकृतिक रंग से ही होली खेलें।

आरटीआई कार्यकर्ता आरपीवाई राव का कहना है कि एफडीए अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि एफडीए उद्देश्य पर कार्य नहीं करता है। ये रासायनिक रंग त्वचा के लिए बेहद खतरनाक हैं, यह आंखों की एलर्जी का कारण हो सकता है, लेकिन सबसे बड़ा खतरा कैंसर का है। इसलिए एफडीए को रासायनिक रंगों पर कड़ाई से निगाह रखनी चाहिए।

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