छोटे पेसमेकर का बड़ा कारनामा

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    छोटे पेसमेकर का बड़ा कारनामा
    मुंबई  -  

    कहा जाता है की वस्तू जितनी बड़ी हो उसका काम उतना ही बड़ा होता है। लेकिन अब ये कहावत सिर्फ ये कहावत ही साबित होती जा रही है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण हाल ही में सैफी हॉस्पिटल में देखा गया है। सैफी अस्पताल के डॉक्टर ने दुनिया के छोटे पेसमेकर का इस्तेमाल करते हुए 78 वर्षीय मरीज को जीवन दिया है। ट्रांसपाथेटर प्रत्यारोपण सर्जरी इस रोगी पर किया गया था। पेसमेकर को दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर होने का दावा किया गया है। इसके साथ ही इस तरह का सर्जरी करनेवाले सैफी अस्पताल मुंबई का तीसरा अस्पताल बन गया है।

    इराक के 78 वर्षीय एक व्यक्ति को सैफी अस्पताल में भर्ती कराया गया था क्योंकि उसे अक्सर चक्कर आते थे। इलाज में पतचा चला किया की इस व्यक्ति को कोरोनरी धमनी रोग( जो एक तरह की फेफड़े संबंधित बीमारी है) हुई है। साथ ही यह भी पता चा की इस व्यक्ति की एक बाईपास सर्जरी पहली ही की जा चुकी है। दिल की रफ्तार कम होने के कारण पेसमेकर का इस्तेमाल कर उसकी सर्जरी करनी पड़ी।
    यदी दिल की धड़कन एक मिनट में 60 बार से कम धड़कने लगे तो उसमें सर्जरी कर एक पेसमेकर बैठाया जाता है। इस पेसमेकर के स्थापित करने से मरीज को स्वास लेने में कोई तकलीफ नही होती है।
    डॉ. अली असगर बैरनवाला, कार्डियोथोरैसिक सर्जरी विभाग के प्रमुख, सैफी अस्पताल का कहना है की ब्रैडीकार्डिया दिल की धड़कन का इलाज करने के लिए इस्तेमाल एक पेसमेकर है, जो पेसमेकर दिल के साथ साथ काम करते है। यांत्रिक उत्तेजक के कारण दिल की गति में वृद्धि हो जाती है।

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