Advertisement

महाराष्ट्र की जेलों में हाई-टेक सिक्योरिटी और बेहतर सुविधाओं के साथ बड़ा बदलाव होगा


महाराष्ट्र की जेलों में हाई-टेक सिक्योरिटी और बेहतर सुविधाओं के साथ बड़ा बदलाव होगा
SHARES

महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार, 6 अप्रैल को कई सरकारी प्रस्ताव (GRs) जारी किए, जिसमें जेल के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े अपग्रेड को मंज़ूरी दी गई। इसका मकसद कैदियों के रहने के हालात को बेहतर बनाना है। यह 1 मार्च को महाराष्ट्र प्रिज़न्स एंड करेक्शनल सर्विसेज़ बिल, 2025 के पास होने के बाद आया है। यह बिल 1894 के प्रिज़न्स एक्ट और 1900 के प्रिज़नर्स एक्ट की जगह लेगा।(Maharashtra Prisons To Get Major Revamp With High-End Tech Security and Better Facilities)

मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड

राज्य ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम खरीदने को मंज़ूरी दी है ताकि कैदी सभी कोर्ट और जेलों में दूर से कोर्ट की सुनवाई में शामिल हो सकें। हर यूनिट सेटअप की कुल अनुमानित लागत INR 22 लाख है।

राज्य ने "जेलों में सिक्योरिटी सिस्टम का मॉडर्नाइज़ेशन" स्कीम के तहत सिक्योरिटी इक्विपमेंट खरीदने को मंज़ूरी दी। मंज़ूर किए गए आइटम में बैगेज स्कैनर और हाई मास्ट पोल शामिल हैं, जिनमें से हर एक की कीमत INR 37 लाख है। इन उपायों का मकसद गैर-कानूनी चीज़ों की एंट्री को रोकना है।

सरकार ने जेलों में प्यूरीफायर वाले वॉटर कूलर और RO+UV सिस्टम लगाने को भी मंज़ूरी दी है।  हर यूनिट की अनुमानित कीमत INR 2.10 लाख है।


सरकार ने खेती-बाड़ी के कामों में मदद के लिए मशीनरी और इक्विपमेंट खरीदने की मंज़ूरी दे दी है। ध्यान दें कि राज्य की जेलों में करीब 300 हेक्टेयर ज़मीन खेती के लिए इस्तेमाल होती है।नया कानून कैदियों के रिहैबिलिटेशन पर फोकस करता है। इसमें कैदियों को समाज में वापस लौटने में मदद करने के लिए ओपन जेल का प्रस्ताव है। इसमें रिहाई के बाद उन्हें सपोर्ट करने के लिए स्ट्रक्चर्ड आफ्टर-केयर सर्विस भी शामिल हैं। बिल में जेंडर-सेंसिटिव प्रोविज़न शामिल हैं।

बिल की खास बातें:


  • कैदियों के लिए शिकायत सुलझाने का सिस्टम
  • जेल के काम में जाति के आधार पर भेदभाव पर रोक
  • साइकेट्रिक और साइकोलॉजिकल केयर समेत दिव्यांग कैदियों की सुरक्षा
  • जेल के अस्पतालों में महिलाओं के लिए अलग वार्ड, जिसमें प्री-नेटल और पोस्ट-नेटल केयर हो
  • ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए खास इंतज़ाम
  • जेलों में लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स, योग और मनोरंजन की एक्टिविटी जैसी सुविधाएं।
  • कैदियों को काम के लिए मुआवज़ा।  बिल इन तरीकों से सिक्योरिटी पर भी फोकस करता है:
  • बायोमेट्रिक्स और RFID-बेस्ड ट्रैकिंग
  • CCTV सर्विलांस और सेंट्रल मॉनिटरिंग
  • इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन
  • वॉचटावर और क्विक-रिस्पॉन्स टीम

पैरोल पर आए और फर्लो पर गए कैदियों की इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग

बिल में कैदियों को अंडरट्रायल, दोषी, हाई-सिक्योरिटी कैदी और युवा अपराधियों जैसी कैटेगरी में बांटने का प्रोविज़न है। हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग इंतज़ाम होंगे। हर ज़िले में अंडरट्रायल रिव्यू कमेटियां भी होंगी।

यह भी पढ़ें- नई मुंबई सिविक बॉडी ने FY26 में 876 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन किया

Read this story in English
संबंधित विषय
मुंबई लाइव की लेटेस्ट न्यूज़ को जानने के लिए अभी सब्सक्राइब करें