मौत के साए में जीने को मजबूर म्हाडावासी

मुंबई - म्हाडा कॉलोनियों की हालत इतनी खस्ता हो गई है कि ये कभी भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। 60 साल से अधिक पुरानी म्हाडा की इन बिल्डिंगों में रहने वालों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। लेकिन नौकरशाही की लापरवाही के चलते 56 म्हाडा कॉलोनियों का पुनर्विकास कार्य रुका हुआ है। म्हाडा ने सितंबर 2010 में केवल हाउसिंग स्टॉक स्वीकार करते हुए म्हाडा की इमारतों के पुनर्विकास कार्य की इजाजत देने का निर्णय लिया और बिल्डरों पर पुनर्विकास का जिम्मा सौंप दिया। जिसके चलते पिछले छह वर्षों में केवल 13 प्रस्ताव पूरे हुए हैं जबकि सैकड़ों इमारतों का पुनर्विकास कार्य रुका हुआ है। जिसे लेकर गुरूवार को म्हाडा के विरोध में जोरदार घोषणाबाजी हुई। आंदोलन कर रहे लोगों की मांग थी कि रुके हुए विकास कार्यों को जल्द शुरू किया जाए।

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