बप्पा की मुर्तियां बनाने के लिए बढ़ रहा है इको फ्रेंडली कलर का ट्रेंड

 Kandiwali
बप्पा की मुर्तियां बनाने के लिए बढ़ रहा है इको फ्रेंडली कलर का ट्रेंड

गणेशोत्सव सिर्फ दो महीने दूर हैं और बप्पा की मुर्तियां बनाने का काम पूरे जोर से शुरु है। जैसे जैसे समय बदलते जा रहा है वैसे वैसे लोग अब धीरे धीरे इको फ्रेंडली मुर्तियों की मांग करने लगे है। चाहे बड़ी मुर्तियां हो या छोटी मुर्तियां , अब हर किसी का रुझान इको फ्रेडली मुर्तियों की ओर बढ़ता जा रहा है। जिसे देखते हुए अब ज्यादातर मुर्तिकार भी इकोफ्रेंडली मुर्तियां बनाना शुरु कर रहे है।

सिर्फ मुर्तियों के लिए ही नहीं बल्की वह मुर्तियों को पेंट करने के लिए भी इको फ्रेंडली कलर का इस्तेमाल कर रहे है। जिससे पर्यावरण को कोई भी नुकसान ना हो। मुंबई जैसे शहर में जहां पर गणपति बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है, साथ ही इस शहर में घरगुत्ती गणपतियों की संख्या काफी अधिक है। लिहाजा अब ज्यादा से ज्यादा मुर्तिकार इको फ्रेंडली कलर का ही इस्तेमाल करते है।


वॉटर कलर का करते है इस्तेमाल
अक्सर पेंटर मुर्तियों को रंगने के लिए इस्तेमाल किए जानेवाले पेंट में तेल पेंट का उपयोग करते है जिससे मुर्ती के विसर्जन के बाद पूरा पेंट समुंद्र में फैल जाता है और समुद्री जीवों की जान को नुकसान होता है। यही कारण है की आज के समय में ज्यादातर मुर्तिकार वाटर कलर का इस्तेमाल करते है। वॉटर कलर में हानिकारक केमिकल की मात्रा बेहद ही कम होती है , जो समुद्री जीवों के लिए हानिकारक नहीं होती है। वॉटर कलर , ऑइल पेंट से काफी सस्ता होता है साथ ही वॉटर कलर का कोई साईडइफेक्ट भी नही है।


ऑइल पेंट से जाती है मछलिओं की जान
दरअसल ऑइल पेंट का इस्तेमाल बड़ी - बड़ी मुर्तियों को चमक देने के लिए किया जाता है। औसतन जिन मुर्तियों की लंबाई 6 फूट से उपर होती है उन मुर्तियों में इस ऑइल पेंट का इस्तेमाल ज्यादा मात्रा में किया जाता है। मुर्ती विसर्जन के तीन दिन बाद ऑइल पेंट समुद्री सतह पर आ जाता है,जिससे मछलियों के साथ साथ अन्य समुद्री जीवो की जान जाती है।

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छोटी मुर्तियों में इको फ्रेडली कलर का इस्तेमाल ज्यादा
ज्यादातर घरगुत्ती गणपति या गणेश की छोटी मुर्तियों में वॉटर कलर का इस्तेमाल किया जाता है। छोटी मुर्तियों को ज्यादा चमक देने की जरुरत नहीं पड़ती इसलिए इन मुर्तियों को वॉटर कलर से पेंट किया जाता है।


वॉटर पेंट कभी समुद्रीू सतह पर नहीं आता
कांदिवली में गणपति की मुर्तियां बनानेवाले शैलेंद्र काले का कहना है की वॉटर कलर कभी समुद्री सतह पर नहीं आते, वह मुर्तियों के साथ ही घूल जाते है। जिससे समुद्र का पानी खराब नहीं होता, और ना ही किसी तरह का कोई नुकसान। इसके अलावा वॉटर कलर के कई और फायदे है जैसे जल्दी सुखना, वॉटर कलर की आसान उपलब्धता, साफ सफाई में आसानी। इसके अलावा जब आप ऑइल पेंट का इस्तेमाल करते है तो मुर्ति को पेंट करने के दौरान कुछ पेंट आपके हाथ में रह जाते है जिससे स्किन की समस्या भी हो सकती है लेकिन वॉटर कलर में ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती।


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