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मराठा आरक्षण को लेकर मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट में आंदोलनकारियों को आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाने को कहा साथ ही कोर्ट ने कहा कि कोई भी आंदोलन किसी की जान से बड़ा नहीं है। यही नहीं इस मामले में सरकार द्वारा गठित कमिटी ने भी 5 सितंबर को रिपोर्ट पेश करने की भी बात कही। अब इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।


कोर्ट ने जताई नाराजगी 
न्यायमूर्ति रणजीत मोरे और न्यायमूर्ति अनुजा देसाई की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए हिंसक आंदोलन और आत्महत्या जैसे कृत्य पर नाराजगी प्रकट की। कोर्ट की तरफ से कहा गया कि जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो आंदोलन और आमहत्या जैसा काम करना गलत है। जब तक मामले की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक मराठा समुदाय आंदोलन न करे। किसी की जान से बढ़ कर आंदोलन नहीं है।


राज्य सरकार ने पेश की अब तक की रिपोर्ट 

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से आरक्षण बाबत कोर्ट ने एक प्रगति रिपोर्ट पेश की गयी जिसमे अब तक सरकार द्वारा किये गए सभी कार्यों का विवरण था। साथ ही राज्य पिछड़ा आयोग की तरफ से सरकारी वकील रवि कदम ने भी इस मामले में 15 नवंबर तक अंतिम रिपोर्ट पेश करने का वादा किया।

पैनल पेश करेगी फाइनल रिपोर्ट 

राज्य सरकार द्वारा 5 संस्थाओं की एक कमिटी का गठन कर उन्हें मराठा समाज की स्थिति की अध्ययन करने के लिए कहा गया है। 25 फरवरी से लेकर 29 जून तक लगभग 2 लाख सुचना इस कमिटी द्वारा प्राप्त किया गया है, जिसका निरिक्षण 3 विषेशज्ञों का एक पैनल करेगा। यह पैनल ही 5 सितंबर को कोर्ट में अपना रिपोर्ट पेश करेगा।

कोर्ट ने एक हफ्ता घटा दी थी सुनवाई की तारीख 

मराठा आंदोलन में हो रही हिंसक घटनाओं और लोगों द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाये जाने के बाद याचिकाकर्ता विनोद पाटील ने कोर्ट से इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई करने की गुहार लगाई थी। जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 14 अगस्त से घटा कर 7 अगस्त कर दी थी।

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