
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत पर तीखा हमला बोला है। नरेश म्हस्के ने कहा कि संजय राउत बिना किसी आधिकारिक जानकारी के ऐसे बयान दे रहे हैं, मानो उन्हें अदालत का फैसला पहले से पता हो।(First manage your party then make political statements, Naresh Mhaske scathing attack on Sanjay Raut)
म्हस्के ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से माना था कि शिवसेना एक ही पार्टी है और उसमें कोई विभाजन नहीं हुआ है। इसी आधार पर आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को दिया था। उन्होंने कहा कि संजय राउत को पहले चुनाव आयोग के फैसले का अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के लिए उबाठा ने हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे के विचारों और सिद्धांतों को छोड़ दिया। म्हस्के ने कहा कि जब अदालत का फैसला उनके पक्ष में होता है तो वे न्यायपालिका की तारीफ करते हैं, लेकिन फैसला खिलाफ आने पर न्यायालय और न्यायाधीशों पर सवाल उठाते हैं। इसलिए संजय राउत की बयानबाज़ी का कोई महत्व नहीं है।
म्हस्के ने कहा कि शिवसेना का विश्वास बालासाहेब ठाकरे के विचारों और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान में है। उन्होंने आरोप लगाया कि उबाठा में बचे हुए नेताओं को साथ रखने के लिए संजय राउत लगातार विवादित बयान दे रहे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले उबाठा को संभालें, उसके बाद एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी करें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उबाठा को कांग्रेस में विलय करने की तैयारी की जा रही है। म्हस्के ने कहा कि दूसरों को विलेय की सलाह देने वाला उद्धव गुट भविष्य में खुद कांग्रेस, एआईएमआईएम या समाजवादी पार्टी जैसे किसी दल में शामिल होने की स्थिति में पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि शिवसेना की चिंता करने के बजाय संजय राउत को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि उनके गुट के बचे हुए विधायक, सांसद और नगरसेवक पार्टी में बने रहें। साथ ही उन्होंने दावा किया कि दोबारा राज्यसभा या लोकसभा पहुंचने के लिए संजय राउत समय आने पर कांग्रेस में भी शामिल हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें- युवा आपके साथ नहीं, सिर्फ़ राजनीति आपके साथ है — विपक्ष पर श्रीकांत शिंदे का करारा हमला
