दोस्ती में दरार बरकरार, 'शिवसेना लड़ेगी अकेले'- संजय राउत

शिवसेना ने मन बना लिया है कि वे अपने दमखम पर ही चुनाव मैदान में उतरेगी। विपक्षी एकता को देखते हुए बीजेपी आगामी चुनाव के लिए एनडीए को मजबूती से खड़ा करना चाहती है लेकिन शिवसेना के रुख को देख कर यही लगता है कि बीजेपी के लिए राह आसान नहीं होने वाली है।

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बुधवार को मातोश्री में बीजेपी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ लगभग 2 घंटे तक मैराथन बैठक की थी, बैठक के बाद बीजेपी की तरफ से ने मिडिया को बताया गया कि अमित शाह खुश हैं क्योंकि बैठक सकारात्मक रही। लेकिन अमित शाह की ख़ुशी शिवसेना ने उस समय छीन लीं जब शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिवसेना के रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है हम अपने ही दम पर चुनाव अकेले लड़ेंगे।  


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'चुनाव अकेले ही लड़ेंगे'

शाह और उद्धव ठाकरे की मुलाक़ात के बाद शिवसेना की तरफ से यह बयान आया है। सांसद संजय राउत ने कहा कि हम जानते हैं कि अमित शाह जी का एजेंडा क्या है, लेकिन शिवसेना ने एक प्रस्ताव पास किया है कि हम अकेले ही चुनाव लड़ेगी। हम इस प्रस्ताव में कोई बदलाव नहीं करेंगे।


बीजपी राह नहीं आसान 

शिवसेना के इस बयान से बीजेपी को झटका लगा है।  विपक्षी एकता को देखते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह एनडीए के साथियों को मनाने की पहल में लगे हैं। हालांकि ये कोशिश कितना रंग लाएगी ये तो भविष्य ही बताएगा। लेकिन वर्तमान में तो यही लग रहा है कि शिवसेना का मूड बदलने का कोई इरादा नहीं है। शिवसेना ने मन बना लिया है कि वे अपने दमखम पर ही चुनाव मैदान में उतरेगी। विपक्षी एकता को देखते हुए बीजेपी आगामी चुनाव के लिए एनडीए को मजबूती से खड़ा करना चाहती है लेकिन शिवसेना के रुख को देख कर यही लगता है कि बीजेपी के लिए राह आसान नहीं होने वाली है।  


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पालघर उपचुनाव के बाद रिश्ते और भी तल्ख़ 

गौरतलब है कि शिवसेना बीजेपी की सबसे बड़ी  सहयोगी पार्टी है। केंद्र में और महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी साथ-साथ में हैं। फिर भी दोनों के रिश्ते काफी तल्ख़ हैं।  बीजेपी की तरफ से कभी डायरेक्ट हमला तो नहीं किया गया लेकिन शिवसेना खुल कर कभी पीएम मोदी पर तो कभी सीएम फडणवीस पर हमला करती है। पालघर उपचुनाव के बाद तो रिश्तों में और भी खटास आ गयी है।

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