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राजभवन की विशेष अतिथि बनीं कंगना

कंगना राणावत के मुंबई पहुंचने से पहले ही जिस तरह से मुंबई महानगरपालिका के अतिक्रमण विभाग का बुलडोजर चलाया गया, उससे कंगना काफी व्यथित हुई।

राजभवन की विशेष अतिथि बनीं कंगना
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मुंबई (mumbai) की तुलना पाक व्याप्त कश्मीर (PoK) से करने के कारण शिवसेना (Shivsena) के निशाने पर आई अभिनेत्री कंगना राणावत (Kangana ranaut) गत दिनों राजभवन (raj bhawan) की विशेष अतिथि बनीं। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (governor bhagat singh koshyari) से 45 मिनट की मुलाकात में अभिनेत्री कंगना राणावत (kangana ranaut)ने कहा कि मुंबई में मुझे असुरक्षित महसूस हो रहा है। 9 सितंबर को मुंबई आने की कंगना राणावत की चुनौती को शिवसेना ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ा, साथ ही शिवसेना ने वाई सुरक्षा प्राप्त कंगना राणावत के साथ बदले की भावना से काम करते हुए उनेक पॉलीहिल स्थित कार्यालय पर मनपा का बुलडोजर चलवाया और जब इस मामले को सीधे-सीधे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) के इशारे पर की गई कार्रवाई करार दे दिया गया तो शिवसेना ने यह कहते हुए इस कार्रवाई से खुद को अलग कर लिया कि इस कार्रवाई से सरकार का कोई लेनादेना नहीं है। कंगना राणावत के मुंबई पहुंचने से पहले ही जिस तरह से मुंबई महानगरपालिका के अतिक्रमण विभाग का बुलडोजर चलाया गया, उससे कंगना काफी व्यथित हुई। 

राज्यपाल से पौन घंटे की मुलाकात में क्या क्या चर्चा हुई, इस बारे में पूरी जानकारी तो नहीं मिली, लेकिन कहा यह जा रहा है कि कंगना ने राज्य में असुरक्षा तथा असंतोष बढ़ने की बात राज्यपाल से अवश्य की होगी। कंगना के कार्यालय ध्वस्त होने के कुछ दिनों बाद ही एक पूर्व तथा सेवानिवृत सैनिक मदन शर्मा (madan sharma) को शिवसैनिकों द्वारा इसलिए पीटा क्यों कि उसने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का व्यंग्य चित्र बनाया था। 

सत्ता पाने का यह अर्थ नहीं सत्ता चलाने वाले कुछ भी कर गुजरे। राज्यपाल से मिलने गई कंगना ने मुंबई में असुरक्षित वतावरण की बात कही, लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस बारे में अभी तक अपना मुंह नहीं खोला है। जिस पूर्व सैनिक अधिकारी के साथ मारपीट हुई न तो उस बारे में शिवसेना प्रमुख ने कुछ कहा और न ही कंगना के ऑफिस पर चले बुलडोजर के बारे में कुछ कहा, हां इतना जरूर कहा कि महाराष्ट्र की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि कंगना राणावात तथा राज्यपाल की मुलाकात भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से तय करायी गई थी।

 राजभवन में 45 मिनट की मुलाकात में कंगना राणावत ने भले ही सीधे तौर पर राज्यपाल से राज्य में राष्ट्रपति शासन (governor rule) लागू करने की बात को नहीं की लेकिन मुंबई असुरक्षित है, सरकार मनमानी कर रही है, मुंबई की जनता में भंयकर असंतोष है, इस तरह की बातें कहकर संकेतों संकेतों में ही राज्यपाल को यह बता दिया कि राज्य में कानून व्यवस्था ठीक नहीं है। राज्य के प्रथम नागरिक से 45 मिनट की मुलाकात काफी मायने रखती है, वह भी ऐसे समय जब विपक्ष सररकार के विरोध में बोलने का एक भी मौका नहीं चूक रहा हो। शिवसेना राज्यपाल से कंगना से की गई मुलाकात को राजनीति के चश्मे से देख रही हैं। उसका कहना है कि कंगना राज्यपाल से मिलने लिए यूं ही गई, उसे भाजपा (BJP) ने राज्यपाल से मिलने के लिए भेजा था। 

शिवसेना प्रवक्ता ने तो यहां तक कहा है कि कंगना विपक्ष के नेता के तौर पर राज्यपाल से मिलने गई थी। विधानसभा में विपक्ष के नेता तथा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (devendra fadnavis) को बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar election) के लिए भाजपा प्रभारी बनाया गया है, इसलिए भाजपा ने कंगना को भाजपा का पक्ष रखने के लिए राजभवन में भेजा। सुशांत सिंह राजपूत (sushant singh rajput) की मौत की जांच के मामले में मुंबई पुलिस का जो रवैय्या रहा है, उसके बाद भी मुंबई पुलिस पर भरोसा रखने का दबाव डालना तथा अपनी ही बात मनवाने या फिर किसी गलत कार्रवाई पर चुप्पी सधाने से मुख्यमंत्री की छवि खराब हो रही है, ऐसे हालातों में कंगना राणावत का राजभवन में 45 मिनट तक रहना तथा राज्यपाल के समक्ष असुरक्षित मुंबई का रोना रोकर कंगना एक तीर से दो निशाने साधे हैं, एक कंगना ने राज्यपाल को अपना दर्द सुनाया और दूसरे उसने विपक्ष की प्रतिनिधि के तौर पर इशारों ही इशारों में राज्यपाल से सामने राज्य सरकार की नाकामी की ओर भी ध्यान आकृष्ट कर दिया, अब देखना है कि राजभवन में विशेष अतिथि के रूप में गई हिमांचल की बेटी कंगना राणावत की गुहार के बाद मुंबई कितनी सुरक्षित  रह पाती है।  

महाराष्ट्र में कायदा-सुव्यवस्था की चिंता व्यक्त करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग बिहार के लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान (chirag paswan) को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक रोहित पवार (rohit pawar) ने आड़े हाथों लेते हुए कहा कि चिराग पासवान बिहार की चिंता करें महाराष्ट्र की नहीं। रोहित पवार का कहना है कि  'सुशांत सिंह की मौत का राजनीतिक लाभ उठाकर खुद का राजनीतिक करियर शुरु करने वाले की मंशा रखने वाली अभिनेत्री के सुर में सूर मिलाकर महाराष्ट्र के विरोध में बोलना आसान है,  लेकिन बिहार की मूलभूत समस्यांओं की जिम्मेदारी लेकर वहां सुधार करना बहुत कठिन है, इसलिए चिराग पासवान  बिहार की चिंता करें, महाराष्ट्र की नहीं। राजभवन में कंगना राणावत की राज्यपाल से हुई मुलाकात को क्या क्या रंग दिया जाएगा, अब सभी की निगाहें उस ओर लगी हुई हैं। 

(Note: यह लेखक के अपने विचार हैं, इस लेख का मुंबई लाइव के साथ कोई संबंध नहीं है।)

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