नारायण राणे को मुहूर्त मिल गया...?

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नारायण राणे को मुहूर्त मिल गया...?

मुंबई - अपने आक्रामक अंदाज के लिए जाने जानेवाले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण राणे फिर एक बार अपने तेवर दिखाते नजर आ रहे हैं। पार्टी छोडने का निर्णय अमल में लाने से पहले नारायण राणे अपने पुत्र पूर्व सांसद निलेश राणे को शिवसेना में भेजने की पुरजोर तैयारी कर चुके हैं। सूत्रों की मानें तो, राणे अपने कांग्रेसत्याग के निर्णय का बड़ा पटाखा फोड़ने के लिए सही समय के इंतजार में हैं।

नारायण राणे के शिवसेना प्रवेश के रास्ते में सबसे बडा रोडा हैं, शिवसेना पार्टीप्रमुख उद्धव ठाकरे की अनुमति... उन्होंने 39 साल शिवसेना में बिताएं। शिवसेना से निकाले जाने के बाद से लेकर अबतक वह उद्धव ठाकरे पर जमकर बरसते रहे। उद्धव ठाकरे भी राणे से दुश्मनी निभाते रहें। फिलहाल उद्धव ठाकरे शिवसेना को नए रंग-रुप में ढालने की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी पुनर्निर्माण प्रक्रिया में एक रणनीति के तहत राणे की घरवापसी की संभावना उद्धव ठाकरे टटोलकर देख रहे हैं। हालांकि, पहले उद्धव इस बात के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन, थिंक टैंक के सदस्यों से सलाह मशवरे के बाद उन्होंने इस बात के लिए हामी भर दी। हाल ही में उद्धव के करीबी मानेजाने वाले शिवसेना के विधान परिषद सदस्य ने नारायण राणे से इस विषय पर चर्चा की। उद्धव का संदेश लेकर आए इस विधायक ने राणे के जुहू स्थित निवास के बंद कमरे में ‘नियम एवम् शर्तें लागू’ वाले अंदाज में गुफ्तगू की।

अहम बात यह हैं कि, पार्टी छोडने के बाद राणे के पास शिवसेना का एकमात्र विकल्प नहीं है। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का विकल्प भी उन्होंने खुला रखा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ मुलाकात में उन्होंने दिल की बात उनतक पहुंचाने की भी कोशिश की। कुछ महीने पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने नारायण राणे के पास बीजेपी में आने की एवज में राज्य में राजस्व मंत्रिपद देने का ‘ऑफर’ रखा था। महत्त्वाकांक्षी नारायण राणे ने उसे ठुकरा दिया। आज स्थिति बदल गई हैं, पलडा बीजेपी की तरफ है और राणे जरुरतमंद हैं। ऐसी हालत में किस पार्टी में प्रवेश करने के लिए जोर लगाया जाएं? शिवसेना? या कांग्रेस? नारायण राणे के सामने यही विवंचना हैं। गुढीपाडवा यानि हिंदू नववर्ष के आस-पास इस विवंचना से मुक्त होने का मुहूर्त राणे को मिलने के पूरे आसार हैं।

नारायण राणे के पुत्र निलेश राणे ने साफ रुप में यही संकेत दिए हैं। बडा निर्णय अमल में लाने से पहले कोकण में अपने निर्वाचन क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की राय जानने की कोशिश निलेश कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस महासचिवपद का इस्तीफा देते हुए सांसद और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण को निशाना बनाते हुए निलेश ने उन्हें निष्क्रिय नेता बताया। अपनी बात का आधार देते हुए उन्होंने रत्नागिरी में गत दो साल से रिक्त जिला अध्यक्ष पद पर किसी को भी नियुक्त न करने की बात रखी। निलेश इतना ही करके नहीं रुके। उन्होंने अपनी मांग पूरी करने के लिए अशोक चव्हाण को 48 घंटों की मोहलत दे डाली। पार्टी छोडने से पहले माहौल तैयार करने के काम में नारायण राणे माहिर हैं। अपनी चार दशकों की राजनैतिक कुशलता दांव पर लगाते हुए, उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की और फिलहाल कांग्रेस न छोडने की बात भी कह दी। पार्टी के किसी भी नेता का नाम न लेते हुए उन्होंने इशारों ही इशारों में ही बहुत कुछ कह दिया। राणे का आरोप हैं कि, कांग्रेस के नेतागण उनके और उनके परिवार के खिलाफ षडयंत्र रच रहे हैं। अपनी पार्टी के नेताओं को आरोपी के कटघरे में खडा करने के बाद उन्होंने शिवसेना और बीजेपी को निशाना बनाते हुए अपनी राजनीतिक पारी को लेकर संभ्रम को बखुबी गहराने दिया। बातों बातों मे अपनी कांग्रेसनिष्ठा के कसीदे भी उन्होंने पढ डाले। दूसरी ओर पार्टी में अपने उपद्रवमूल्य को साबित कर जल्द ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्षपद की माला अपने गले में डालने के लिए राणे के आतुर होने का आरोप राजनैतिक विश्लेषक कर रहे हैं।

यह पहली बार नहीं हुआ, जब राणे ने बगावत के सूर अलापे हो। कांग्रेस में आने के बाद राणे कई बार बगावत का परचम लहरा चूके हैं। हर बार उनका दाव उल्टा पड गया। इतिहास खुद को दोहराता हैं। इस बात को नारायण राणे खुब जानते हैं। लिहाजा, यह लाजमी हैं कि बगावत को कुचला न जाए, यह सोचकर राणे अपना हर कदम फूंक फूंक कर रखें।

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