'जुमलों' में दम है रे बाबा...

 Dadar
'जुमलों' में दम है रे बाबा...

मुंबई - जुमले और चुनाव का बहुत पुराना रिश्ता है। चुनाव जीतने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला जुमला जितना दमदार होगा उतना लोग आकर्षित होंगे। पिछले संसदीय चुनाव में जिस तरह से बीजेपी ने ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ जुमले का इस्तेमाल किया था, वह जुमला चुनाव के समय या कहा जाए तो अभी तक इस जुमले को विरोधी पक्ष उछालते रहते हैं। यही कुछ देखने को मिला इस बीएमसी चुनाव में। एक बार फिर से शिवसेना बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस चुनाव में शिवसेना ने जुमलों का इस्तेमाल जम कर किया। जुमलों और शिवसेना का बहुत पुराना रिश्ता है। जब से शिवसेना पार्टी की स्थापना हुई तबसे लेकर अब तक अनेक जुमलें बनें, उनका इस्तेमाल हुआ, और पार्टी जीत कर भी आई। 50 साल पुरानी पार्टी में बहुत कुछ बदला, लेकिन कुछ नहीं बदला तो वह है जुमला। शिवसेना हर बार जुमला इस्तेमाल करती है और हर बार यह जुमला बड़ा ही उग्र होता है। विपक्षी जल भुन जाते हैं। शिवसेना के लिए ‘ट्रेडमार्क’ बनते जा रहे जुमले में इस बार कुछ नया देखने को मिला। इस बार के चुनाव में शिवसेना ने नए और पुराने जुमलों को मिलाकर नया जुमला बनाया और उसे इस्तेमाल किया। इस बार जो जुमले सुनने को मिले वो...

अरे जिंकून जिंकून जिंकणार कोण? शिवसेनेशिवाय आहेच कोण?
(अरे जीत कर आएगा कौन? शिवसेना के अलावा है कौन?)

कोण आला रे कोण आला? शिवसेनेचा वाघ आला…

(कौन आया रे कौन आया? शिवसेना का बाघ आया) ...जैसे चिरपरिचित अंदाज में जुमले पेश किये गये।

विरोधियों को जलाने के लिए कुछ जुमले बड़े ही सटीक बनाये गए थे... जैसे
बघताय काय रागाने, बाजी मारलंय वाघाने,
मुबई आमच्या साहेबांची, नाही कुणाची बापाची

शिवसेना ने कुछ पार्टियों के लिए द्विअर्थी जुमलें भी बनाये जैसे...
राजाला लाथ दिली, भाजपाला केला XXX, पालिकेवर फडकणार शिवसेनेचा भगवा

शिवसेना ने बागी नेताओं को भी नहीं छोड़ा उसने बागियों के लिए कुछ इस तरह का जुमला तैयार किया था...
नीम का पत्ता कडवा हैं… अमुक तमुक XXX हैं।

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