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चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के क्रिमिनल रिकॉर्ड को पार्टियां सार्वजानिक रूप से करें प्रकाशित, सुप्रीम कोर्ट दिया आदेश

राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने प्रत्याशियों के आपराधिक रेकॉर्ड को अखबारों, बेवसाइट्स और सोशल साइट्स पर प्रकाशित करे।

चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के क्रिमिनल रिकॉर्ड को पार्टियां सार्वजानिक रूप से करें प्रकाशित, सुप्रीम कोर्ट दिया आदेश
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक सुनवाई के दौरान राजनीतिक दलों (political parties) से कहा कि, अगर उनकी पार्टी से कोई उम्मीदवार (party candidate) चुनाव लड़ता है तो उस उम्मीदवार का क्रिमिनल रिकॉर्ड (criminal record) को सार्वजनिक रूप से  प्रकाशित करे। यानी इसका मतलब है कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के क्रिमिनल रेकॉर्ड को जनता आसानी से देख सकेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राजनीतिक दल इस आदेश का पालन नहीं  करते हैं तो इसे कोर्ट की अवमानना (Contempt of court) मानते हुए  ार्रवाई भी की जा सकती है।

क्या कहा कोर्ट ने?

राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने प्रत्याशियों के आपराधिक रेकॉर्ड को अखबारों, बेवसाइट्स और सोशल साइट्स पर प्रकाशित करे।

कोर्ट ने पार्टियों से सवाल किया कि, आखिर उनकी ऐसी क्या मजबूरी होती है कि वे क्रिमिनल छवि वाले लोगों को टिकट देती हैं। 

अब राजनीतिक पार्टियों को ऐसे दागी उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग (Election Commission) को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी और बताना होगा कि उनके खिलाफ कौन-कौन सा केस चल रहा है। जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल कोर्ट की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इस पर खुद संज्ञान लेते हुए इस पर कार्रवाई कर सकती है।

आपको बता दें कि, राजनीती में जिस तरह से दागी छवि वाले नेताओं की भागीदारी बढ़ी है उस पर कोर्ट कई बार चिंता जता चुका है। इस पर रोक लगाने के लिए कोर्ट कई बार पार्टियों को कदम उठाने का निर्देश भी दे चुका है लेकिन पार्टियां हर बार कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करती नजर आती हैं, इसीलिए इस बार कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कार्रवाई भी करने का फैसला किया है।

अब देखना होगा कि कोर्ट के आदेश का पालन राजनीतिक दल इस बार भी करते हैं या फिर वही ढाक के तीन पात हो साबित होता है।

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