फ़्लैट पजेशन में देरी, मह'रेरा' ने बिल्डर को सिखाया 'सबक'

महरेरा ने एक पीड़ित ग्राहक के हक में फैसला सुनाते हुए बहानेबाज बिल्डर को सबक सिखाते हुए यह आदेश दिया कि ग्राहक के घर की लागत में 5 फीसदी रकम माफ़ करे।

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बिल्डर द्वारा निर्माणाधीन योजना अगर किसी कारणवश विलम्ब हो जाती थी तो बिल्डर बालू की कमी, मजदूरों की कमी या फिर बारिश होने का रटारटाया जवाब देते थे, जीएसटी और नोटबंदी लागू होने के बाद जैसे तो उन्हें एक और बहाना मिल गया था। लेकिन अब मह'रेरा' ने इस तरह के बहानेबाज बिल्डरों की खैर लेते हुए चेतावनी दी है कि अगर किसी बिल्डर का प्रोजेक्ट लेट होता है तो वे जीएसटी और नोटबंदी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। ऐसे ही एक मामले में महरेरा ने एक पीड़ित ग्राहक के हक में फैसला सुनाते हुए बहानेबाज बिल्डर को सबक सिखाते हुए यह आदेश दिया कि ग्राहक के घर की लागत में 5 फीसदी रकम माफ़ करे।


क्या था मामला?

नेहा अग्रवाल नामकी महिला ने 'सेठ' ग्रुप के द्वारा बोरीवली में चलाये जा रहे 'सेठ मिडोरी' योजना में जनवरी 2016 में फ़्लैट बुक कराया था। घर की कुल लागत में से नेहा ने 95 फीसदी रकम जमा कर दिया था। एग्रीमेंट के अनुसार अग्रवाल को बिल्डर ने अक्टूबर 2016 में घर का पजेशन देने का वादा किया था, लेकिन बिल्डर अपने वादे पर खरा नहीं उतर पाया। वह बिल्डर नेहा को कभी जीएसटी तो कभी नोटबंदी का हवाला देकर हमेशा बहाना बनाता था।


महरेरा ने दी सजा

बिल्डर की इस हरकत से तंग आकर नेहा ने महरेरा की शरण ली। महरेरा के अध्यक्ष गौतम चटर्जी ने मामले की सुनवाई करते हुए 30 जनवरी को अपना फैसला सुनाया। इस सुनवाई में महारेरा ने बिल्डर को दोषी माना। महारेरा ने माना कि बिल्डर ने प्रोजेक्ट में देरी होने का कारण कभी नोटबंदी को तो कभी जीएसटी तो कभी बालू की कमी तो कभी मजदूरों की कमी या फिर बारिश का होना बताया। महरेरा ने अपने फैसले में कहा कि जितना फ़्लैट की लागत है उसमे से 5 फीसदी रकम बिल्डर द्वारा माफ़ किया जाये। यही नहीं महरेरा ने बिल्डर को यह भी आदेश देते हुए कहा कि वे किसी भी तरह से नेहा अग्रवाल को 31 मार्च 2018 तक फ़्लैट का पजेशन दे दे।

महरेरा के इस फैसले से अब यह निश्चित हो गया है कि बहानेबाज बिल्डरों की अब एक नहीं चलेगी। यह फैसला ग्राहकों के हित में तो बिल्डरों के लिए एक सबक बताया जा रहा है।


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