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कोरोना काल में बढ़ी बेरोजगारी, महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित

लॉकडाउन (lockdown) से आम आदमी की ही नहीं बल्कि देश की भी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। हजारों लाखों लोगों की नोकरियां और काम धंदे बंद हो गई या छूट गयी।

कोरोना काल में बढ़ी बेरोजगारी, महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित
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कोरोना (covid19) के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन (lockdown) से आम आदमी की ही नहीं बल्कि देश की भी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। हजारों लाखों लोगों की नोकरियां और काम धंदे बंद हो गई या छूट गयी।

इसी कड़ी में कोरोना (coronavirus) काल में बेरोजगारी (unemployment) की सबसे मार जिन राज्यों में पड़ी उनमें महाराष्ट्र (maharashtra) भी शामिल है। महाराष्ट्र के शहरी इलाकों सहित ग्रामीण इलाकों में भी बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। राज्य में शहरी बेरोजगारी दर पिछले साल अप्रैल-जून में 35.6 फीसदी थी और जुलाई-सितंबर में 22.6 फीसदी थी। महाराष्ट्र के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी क्रमशः 20.9 प्रतिशत और 12.3 प्रतिशत के औसत से अधिक थी।

बेरोजगारी के यह आंकड़े जुलाई से सितंबर 2020 की अवधि के लिए मैन पावर की तिमाही रिपोर्ट पर आधारित हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में बेरोजगारी दर दो तिमाहियों में 32 फीसदी और 19.8 फीसदी थी। केरल में भी बेरोजगारी दर अप्रैल और जून 2020 के बीच 27.3 प्रतिशत और जुलाई और सितंबर 2020 के बीच 18.9 प्रतिशत थी।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर है। इसके बाद झारखंड, केरल और जम्मू-कश्मीर का नंबर आता है। जुलाई-सितंबर 2020 में जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दर 17.4 फीसदी थी। इसके बाद क्रमश: 16.5 प्रतिशत और 15.4 प्रतिशत के साथ ओडिशा और तेलंगाना का स्थान रहा। दिल्ली में भी बेरोजगारी की दर अप्रैल और जून 2020 के बीच 10.5 प्रतिशत और जुलाई और सितंबर 2020 के बीच 4.5 प्रतिशत थी।

जुलाई-सितंबर के दौरान पुरुषों और महिलाओं की बेरोजगारी दर क्रमश: 12.6 फीसदी और 15.8 फीसदी थी। पिछली तिमाही में दरें 20.8 फीसदी और 21.2 फीसदी थीं। जुलाई-सितंबर 2019 के दौरान, पुरुषों के लिए बेरोजगारी दर 8 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 9.7 प्रतिशत थी।

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