बेस्ट को घाटे से उबारने के लिए कर्मचारियों ने कसी कमर , खुद कर रहे हैं मार्केटिंग

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बेस्ट को घाटे से उबारने के लिए कर्मचारियों ने कसी कमर , खुद कर रहे हैं मार्केटिंग
बेस्ट को घाटे से उबारने के लिए कर्मचारियों ने कसी कमर , खुद कर रहे हैं मार्केटिंग
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मुंबई  -  

घाटे में चल रहे बेस्ट परिवहन को घाटे से उबारने के लिए अब खुद बेस्ट कमर्चारियों ने भी कमर कस ली है। हालंकि इसके लिए बेस्ट प्रबंधन ने कई कदम उठाते हुए कई प्लान बनाए हैं, बावजूद इसके अब बेस्ट के कर्मचारी खुद ही बेस्ट की मार्केटिंग कर यात्रियों को बेस्ट की बस से यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसे इन दो दृश्यों से समझा जा सकता है।


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पहला दृश्य

जोगेश्वरी बस डिपो के बाहर शेयर में चलने वाले रिक्शा की लाइन लगी रहती है। अमूमन बेस्ट का मिनिमम किराया 8 रुपया है जबकि शेयर रिक्शा वाले 10 रुपया लेते हैं। यात्री अपना समय बचाने के लिए 10 रूपया देकर जाते हैं। अब घाटे में चल रही बेस्ट की बसों के लिए यह चुनौती है कि वे यात्रियों को 'बेस्ट' की तरफ लाए। इसके लिए बेस्ट के कर्मचारियों ने 'बेस्ट' के लिए मार्केटिंग करना शुरू किया। बेस्ट के कर्मचारियों ने लाउड स्पीकर लेकर खुद ही लोगों को बस से यात्रा करने के लिए बेस्ट के कम कीमतों और उसके रूट के बारे में बताने लगे। इन्हें यकीन है कि ऐसा करने से बेस्ट के यात्रियों में जरुर वृद्धि होगी।

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दूसरा दृश्य

दूसरा दृश्य है वडाला का। वडाला के संगम नगर से वडाला स्टेशन तक जाने के लिए 110 नंबर की बस सेवा शुरू की गयी। इसके पहले यह बस स्टेशन तक नहीं जाती थी। लोग टैक्सी करके स्टेशन तक जाते थे। इससे बेस्ट को घाटा हो रहा था।अब उसने रूट में थोड़ा परिवर्तन करके बस को स्टेशन तक शुरू किया है। यही नहीं इसकी जानकारी आम लोगो को हो इसके लिए बेस्ट के कर्मचारी खुद ही पंपलेट बांटते नजर आए। इसमें बस के रूट की जानकारी, उसके छूटने और किराए आदि की सभी जानकारियां उपलब्ध थी।

इन दोनों दृश्य को देखने से पता चलता है कि बेस्ट अब खुद ही घाटे को कम करने केलिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है। इसके लिए कर्मचारियों ने जहां कार्य के घंटे में वृद्धि की तो रूटों में भी विस्तार किया है , ताकि बेस्ट के यात्रियों में वृध्दि हो सकें।


अन्य 'बेस्ट' उपाय

इसके आलावा बेस्ट ने कर्मचारियों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं जैसे कर्मचारियों के मेडिकल और उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी अब खत्म करने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा बेस्ट प्रबंधन ने बेस्ट के 'ए' और 'बी' अधिकारीयों को मिलने वाली सुविधाओं में भी कटौती किया है, अब महाप्रबंधक और अन्य बड़े अधिकारियों की गाड़ियों में चलने के लिए मुफ्त में पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेंगे।


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