हाई कोर्ट ने आरे में कारशेड बनने को दी मंजूरी


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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मेट्रो-3 के कारशेड को मुंबई के आरे कॉलोनी में बनने की इजाजत दे दी है। इसके पहले कई पर्यावरण प्रेमियों और संगठनों ने इस कारशेड का विरोध यह कहते हुए जताया था कि इस कारशेड के बनने से यहां कई पेड़ों को काटा जाएगा जिससे पर्यावरण को नुकसान होगा। कोर्ट के इस फैसले से मुंबई मेट्रो रेल काॅर्पोरेशन (एमएमआरसी) को बड़ी राहत मिली है।

महाराष्ट्र सरकार की सहायता से मुंबई मेट्रो रेल काॅर्पोरेशन (एमएमआरसी) कुलाबा-बांद्रा-सीप्ज रुट पर चलने वाली भूमिगत मेट्रो ट्रेन के लिए आरे कॉलोनी में कारशेड बना रही है। इस कारशेड को बनाने के लिए 33 हेक्टेयर जमीन लगेगी जिसके लिए कई पेड़ों को भी काटा जाएगा, इसी बात का विरोध कई पर्यावरण प्रेमी और संघटन कर रहे हैं। इस कारशेड के विरोध में हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल कर मांग की गयी थी कि आरे 103 किमी में फैला संरक्षित जंगल है और यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करना सही नहीं है। इसीलिए इस कारशेड को बनने पर रोक लगे।

इस याचिका को लेकर शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कारशेड के खिलाफ दायर की गई याचिका को रिजेक्ट कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 33 हेक्टेयर पर जो कारशेड बनेगा उसके लिए सभी नियमों का पालन करने का आश्वासन जब सरकार ने दिया है तो इसे रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है।

कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 'सेव आरे' के सदस्य जोरू बाथेना ने बताया कि अभी तक कोर्ट के फैसले की प्रति हमारे पास नहीं आई है। अगर कॉपी  हमारे पास आती है तो उसे पढ़ कर हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। 

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