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किसान बिल के खिलाफ महाराष्ट्र भर के किसान 23 जनवरी को वाहन मोर्चा का करेंगे आयोजन

इस कामगार मोर्चा की तरफ से महाराष्ट्र भर के किसानों को आजाद मैदान में इकट्ठा होने और 24 जनवरी से अपना धरना-प्रदर्शन शुरू करने की अपील की गई है।

किसान बिल के खिलाफ महाराष्ट्र भर के किसान 23 जनवरी को वाहन मोर्चा का करेंगे आयोजन
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किसान बिल (farmer bill) के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन कर रहे पंजाब (punjab) और हरियाणा (hariyana) के किसानों को अब महाराष्ट्र (maharashtra) के किसानों से भी समर्थन मिल रहा है। महाराष्ट्र के संयुक्त शेतकरी कामगार मोर्चा (SSKM) ने एक बयान में कहा कि, वे किसान आंदोलन के खिलाफ 23 जनवरी को बड़ी संख्या में किसान और श्रमिक वाहन मोर्चे का आयोजन करेंगे।

इस कामगार मोर्चा की तरफ से महाराष्ट्र भर के किसानों को आजाद मैदान में इकट्ठा होने और 24 जनवरी से अपना धरना-प्रदर्शन शुरू करने की अपील की गई है। यह विरोध प्रदर्शन 25 जनवरी को राजभवन में चलेगा, जबकि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर आज़ाद मैदान (azad maidan) में तिरंगा फहराने की उम्मीद है।

इस किसान बिल के विरोध में SSKM के अलावा ट्रेड यूनियन्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी (TUJAC), स्ट्रगल कमेटी ऑफ मास मूवमेंट्स (JASS), नेशन फॉर फार्मर्स, सिटीजन राइट्स ग्रुप, Hum Bharat Ke Log (HBKL), ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) के जैसे संगठन भी शामिल हैं।

SSKM ने कथित तौर पर राज्य सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराया है। इस मांग केे तहत महात्मा फुले ऋण माफी योजना और वन अधिकार अधिनियम को लागू करने की मांग करने और 2018 भूमि अधिग्रहण अधिनियम को निरस्त करने के साथ 2014 भूमि अधिग्रहण अधिनियम में बदलाव करने की मांग जैसे मुद्दे शामिल हैं।

SSKM ने पिछले हफ्ते कहा था कि, 'NCP सुप्रीमो शरद पवार (sharad pawar), सीएम उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) के साथ ही बालासाहेब थोरात (balasaheb throat) जैसे कैबिनेट मंत्रियों ने इस लड़ाई में पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है और 25 जनवरी को राजभवन में मार्च में भाग लेने के लिए सहमत भी हुए हैं।'

18 जनवरी को देश भर के किसानों ने महिला किसान दिवस मनाया। कई महिलाएं, कार्यकर्ता, किसान और साथ ही मुंबईकर सोमवार को शाम 4:30 बजे वीर कोतवाल गार्डन के पास एकत्रित हुए।  चूंकि उन्हें बगीचे में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी, इसलिए यह कार्यक्रम एक फुटपाथ के बाहर आयोजित किया गया था। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि, महिला किसानों को पुरुषों के बराबर भूमि के मालिकाना हक के लिए अधिकार मिलना चाहिए।

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