कुछ शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने कोस्टल रोड परियोजना को दी हरी झंडी

दरअसल इस योजना के तहत समुद्री किनारों को मिटटी से पाटा जाना था ताकि वहां सड़क बन सके, लेकिन कोली समुदाय सहित पर्यावरणविद भी इसके खिलाफ हो गये। कोली समाज का कहना था कि मिटटी पाटने से उनकी जीविका पर असर पड़ेगा। इसके बाद इस योजना के खिलाफ कई सारी याचिका कोर्ट में दाखिल की गयीं।

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कोस्टल रोड परियोजना के लिए शिवसेना को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस परियोजना पर लगाया स्टे  हटा लिया है। इससे अब बीएमसी जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू कर सकती है। गौरतलब है कि पर्यावरण और अपनी आजीविका के लिए कोली समुदाय और पर्यावरणविदों ने  इस परियोजना के विरोध में कई याचिका कोर्ट में दाखिल की थी।

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'कोर्ट ने शर्त के साथ हटाया स्टे'
इसके पहले 23 अप्रैल को हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए इस पर स्टे लगा हटाने से इनकार कर दिया था। तब बीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और कुछ शतों के साथ स्टे को हटाने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, इस परियोजना पर रोक लगाना जनहित दृष्टि से ठीक नहीं है। सुप्रीम  कोर्ट ने यह भी कहा कि, चूंकि इस परियोजना के खिलाफ अन्य मामले की सुनवाई जून में होनी हैं, अगर बीएमसी काम शुरू करना चाहती है, तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी पर शुरू करना चाहिए। कयास लगाए जा रहे हैं कि बीएमसी मानसून आने से पहले काम शुरू कर सकती है।

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इस बात का था विरोध 
दरअसल इस योजना के तहत समुद्री किनारों को मिटटी से पाटा जाना था ताकि वहां सड़क बन सके, लेकिन कोली समुदाय सहित पर्यावरणविद भी इसके खिलाफ हो गये। कोली समाज का कहना था कि मिटटी पाटने  से उनकी जीविका पर असर पड़ेगा। इसके बाद इस योजना के खिलाफ कई सारी याचिका कोर्ट में दाखिल की गयीं। सोमवार को जो सुनवाई हुई उसमें कोर्ट ने बीएमसी को किनारों पर मिट्टी नहीं पाटने का आदेश दिया।

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ट्राफिक जाम से मिलेगा छुटकारा 
आपको बता दें कि नरीमन पॉइंट से दहिसर तक बनने वाले लगभग 34 किलोमीटर की यह कोस्टल रोड टोल फ्री होगी। इसके बन जाने के बाद प्रिंसेस स्ट्रीट से वर्ली सी लिंक तक बिना किसी सिग्नल के चंद मिनटों में पहुंचा जा सकेगा और फिर सी लिंक से बांद्रा और वर्सोवा तक का सफर तय हो सकेगा। पहले हिस्से का काम बीएमसी तो दुसरे हिस्से का काम MMRDA करेगी।

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