खून पसीने की कमाई को बचाएं , 'रेरा' में पंजीकृत बिल्डरों से ही ख़रीदे घर

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खून पसीने की कमाई को बचाएं , 'रेरा' में पंजीकृत बिल्डरों से ही ख़रीदे घर

महाराष्ट्र रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के अस्तित्व में आने के बाद राज्य सरकार दावा कर रही है कि घर खरीददारों का शोषण खत्म हो जाएगा। लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार ने आरोप लगाया है कि सरकार का दावा खोखला है क्योंकि 'रेरा' उन परियोजनाओं से सम्बंधित धोखाधड़ी के मामले ही देखेगा जो इसके साथ पंजीकृत हैं। इसका मतलब है कि फर्जी बिल्डर्स और उनकी कंपनियां ऐसे ही घर खरीददारों को धोखा देंगी और उनके खिलाफ कोई कर्रवाई भी नहीं होंगी, क्योंकि वे तो 'रेरा' में रजिस्टर्ड ही नहीं होंगे।

विजय कुंभार ने फर्जी बिल्डरों और उनकी परियोजनाओं के बारे में 'रेरा' प्रमुख से जानकारी मांगी थी और उनके खिलाफ होने वाली कार्रवाई की भी जानकारी मांगी थी। इसका जवाब में चौकाने वाला आया, कुंभार को सूचित किया गया कि 'रेरा' उन परियोजनाओं के खिलाफ ही एक्शन लेगा जो इसके साथ पंजीकृत हैं।

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कुंभार ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया और आरोप लगाया कि इस संबंध में केन्द्रीय और राज्य सरकार के कानूनों के बीच एक बड़ा सा अंतर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केन्द्रीय कानून के अनुसार पंजीकृत बिल्डरों को ही अपने पंजीकृत परियोजनाओं को बेचने की अनुमति होगी और जो बिल्डर पंजीकृत नहीं होगा ऐसा करने पर पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। हालांकि 'रेरा' राज्य सरकार के उन बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं जिनके परियोजनाएं इसके साथ पंजीकृत हैं। यह स्थिति घर खरीददारों के लिए हित में नहीं है।

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राज्य में 'रेरा' लागू होने के बावजूद घर खरीददारों के साथ धोखाधड़ी होने की आशंका जताई जा रही है। इस धोखाधड़ी को रोकने की आवश्यकता है और इसलिए कुंभार ने 'रेरा' की इन तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए आवास मंत्रालय को पत्र लिखने का फैसला किया है।


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